भगवान भास्कर का महापर्व छठ पूजा सुबह के अर्घ्य के साथ संपन्न
सुंदरगढ़ जिला के राजगांगपुर शहर में भगवान भास्कर का महापर्व छठ पूजा का संध्या कालीन सूर्य को अर्घ्य समर्पित के साथ सुबह का अर्घ्य के साथ संपन्न हुआ।
ऐसे तो बुधवार और बृहस्पतिवार के दिन छठ पूजा की धूम पूरे देश में रही।
बुधवार के दिन छठ व्रतियों ने आस्था के महापर्व छठ पर्व पर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देते हुए छठी मैया की पूजा आराधना की और बृहस्पतिवार की सुबह पुनः भगवान सूर्य को सुबह का अर्ध्य देकर छठ ब्रत संपन्न किया।
चार दिनों तक चलने वाले छठ महापर्व विश्व के कोने कोने में मनाया जाता है । चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा होती है । छठ के पर्व में उगते हुए और डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है । इस महापर्व को खासतौर पर बिहार , झारखंड , उत्तरप्रदेश समेत पूर्वी एवं उत्तर भारत में बहुत ही उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जाता है ।
इस पर्व की महत्ता अब केवल भारत तक ही सीमित नहीं है बल्कि विदेशों में भी इसे बड़े धूमधाम ने मनाया जाता है । सोमवार को नहाय खाय के साथ पर्व का शुभारंभ हुआ । मंगलवार खरना पूजा के बाद से आरंभ हुआ व्रतियों का 36 घंटों का निर्जला उपवास गुरुवार सुबह पालन के उपरांत समाप्त हुआ । बुधवार के दिन अस्तगामी सूर्य देव को अर्घ्य समर्पित किया गया । गुरुवार प्रातः काल उदयमान सूर्य देव को अर्घ्य समर्पित के साथ राजगांगपुर शहर में लोगों ने धूमधाम से छठ पर्व मनाया एवं जीवन में सफलता , सर्वांगीण उन्नति , सुख समृद्धि , वैभव , वीरता , खुशहाली समेत देश की प्रगति समेत समाज के बुराईयों का अंत करने समेत कोविड महामारी से संपुर्ण निजात पाने एवं दिर्घायु होने , घर के बुजुर्गो समेत माता - पिता का सम्मान करने , बच्चों में अच्छे संस्कार समेत अपने सुकर्तव्य क्षेत्र में अमिट दृष्टि संपन्न होने , बल , यश , किर्ति , मान , सम्मान , बुद्धि , विद्या समेत सूर्य देव के आशिर्वाद को सदा आत्मसात करने , घर में खुशियों की सूर्य देव से आराधना , प्रार्थना की गई।





