दुर्घटनाओ का कारण बनती जा रही है सड़क

दुर्घटनाओ का कारण बनती जा रही है सड़क

अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ) 

यम का द्वार बनती राष्ट्रीय राजमार्ग, और कितने लोगो की मौत के बाद टुटेगी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद। 
यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्थानीय प्रशासन, राजनेता और विशेषकर सत्तासीन सरकार के नेता इस मामले को लेकर तालचेर जिले में आवाज नहीं उठा रहे हैं।  
तालचेर क्षेत्र में अब तक 21 पंचायतों में से कोयला खदानों, एफसीआई थर्मल, कोलवासेरी और छोटी फैक्ट्रियों के लिए आसपास के 200 गांवों की सारी जमीन, मकान, जंगल, झरने, जलाशय आदि से लोग वंचित होकर विस्थापित हो चुके।  

तालचेर से राज्य और केन्द्र दोनों सरकारो को करोडो़ रूपये राजस्व के रूप में मिल रही है, परंतु तालचेर के लोगों के लिए ना तो अच्छी सड़क है, और ना ही अच्छी स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छ पानी, स्वस्थ वातावरण, बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए स्कूल, बुजुर्गों के लिए मनोरंजन केंद्र, खेल विकास के लिए अच्छा बुनियादी ढांचा।

 ब्रिटिश शासन के तहत, 1928 में यहां भूमिगत कोयला खदानें बनाई गईं, उस समय कोयला ट्रेनों और स्टीम ट्रेनों द्वारा तालचेर से विभिन्न स्थानों पर कोयला निर्यात   किया जा रहा था।  
तालचेर के लोगों ने देश हित में अपना बहुत कुछ छोड़ दिया है।जबकि कोयले खान प्रबंधनो और राजनेता यहाँ के लोगो को लॉलीपॉप देकर लुभाते रहे हैं।  जैसे-जैसे चुनाव करीब आता है, अगले पांच वर्षों में वह नेता दिखाई देगा जिसने फेसबुक पर एक प्रोफाइल बनाई , और जाते समय अपनी विभिन्न तस्वीरें पोस्ट की हैं,ये नेता केवल सोशल मीडिया पर ही दिखाई देते है।

यह सड़क गोदीबांधा से तलबेड़ा, तालचेर बाईपास, पवित्र मोहनचौक, बहलर, चैपाल तक लगभग 17 किमी बाणरापाल में कटक और अंगुल  राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ती है। 
यह आज, 17 किमी तक की सड़क जीर्ण शीर्ण अवस्था में है, आस-पास के गांवों, स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों और कार्यालयों  के लोग सांस की तकलीफ और अन्य गंभीर रोगो से पीड़ित हैं।  

इस सड़क से होकर रोजाना अन्य वाहनो सहित विभिन्न खानो के कोयले से लदी 5,000 ट्रक 
प्रतिदिन गुजरते हैं, जिससे व्यापक प्रदूषण होता है।

मानसून  के दौरान, कोयला खानों से ट्रक निकलकर बांकधरा चौक तक पहुंचते हैं, जहां से वे राजमार्ग में प्रवेश करते है और राजमार्ग होते हुए अपने गंतव्य तक जाते हैं।  नतीजतन, खदानों से भारी मात्रा में कोयला और खनिज ट्रक के पहिए पर चिपक जाते है। और सड़क मार्ग पर पहिए में चिपका कोयला चूर्ण का एक  स्तर बन जाता है। जिसपर मोटरसाइकिल, स्कुटी व अन्य वाहनो के पहिए फिसलकर घातक रूप ले लेते है, कभी कभी ऐसी दुर्घटनाएं किसी के मौत का कारण भी बन जाती है। 

फलस्वरूप इस राष्ट्रीय राजपथ में आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती है सैकड़ों लोग इन दुर्घटनाओ में अपनी जान गवाँ बैठते है। स्थानीय लोगो की शिकायत है कि  इन सबके बावजूद प्रशासन की कुंभकर्णी नींद कब खुलेगी। 
इस मार्ग से होकर राज्यपाल, नेता, सांसद, पूर्वतन नेता जैसे जनप्रतिनीधी हर रोज गुजरते है,फिरभी इतनी बडी़ समस्या की अनदेखी होना तालचेर में चर्चा का बिषय बनी हुई है।