झामुमो ने गीता कोड़ा के सामने जोबा माझी को उतारा

झामुमो ने गीता कोड़ा के सामने जोबा माझी को उतारा

गीता कोड़ा के सामने झामुमो ने जोबा माझी को उतार कर अपना चुनावी दांव खेल दिया है। एक तरफ भ्रष्टाचार के आरोपित तो दूसरी ओर आज भी परंपरागत जीवन शैली को अपनाई हुई घर के आंगन में गोबर लीपती मिलेंगी जोबा माझी। मुख्यमंत्री चम्पाई के बाद सबसे वरिष्ठ और पूर्व के बिहार सरकार के राबड़ी मंत्रालय में मंत्री रहीं झारखंड की अब एकमात्र विधायक जोबा माझी। वे अपने पति दवेन्द्र माझी की हत्या के बाद राजनीति में आईं। राजनीति में आने के बाद वे मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र में छा गईं। पांच बार की विधायक जोबा ने एक बार वर्ष 2009 में चुनाव हारा। इस हार को भुलाकर वे अगले चुनाव 2014 व 2019 में आराम से जीतीं। काफी हद तक साम्यवादी विचारधारा के समर्थक देवेन्द्र माझी ने अपनी जिंदगी में जनप्रतिनिधियों के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया।

राजनीति के गलियारे में ऐसी चर्चा है कि, जोबा को टिकट देकर झामुमो ने मास्टर स्ट्रोक खेल दिया है।जोबा माझी मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन के बाद सबसे वरिष्ठ नेता व दिशोम गुरु परिवार की करीबी मानी जाती हैं बिहार सरकार के राबड़ी मंत्रालय में मंत्री रहीं झारखंड की अब एकमात्र विधायक जोवा मांझी।

•पांच वार की विधायक जोवा मांझी वर्ष 2009 में एक बार चुनाव में हार का भी सामना किया है।

•1980 से लेकर 1990 तक देवेन्द्र माझी विधायक रहे थे, तब भी जोबा वाजार में सब्जियां बेचती थी। पति देवेंद्र ने भी अपनी पत्नी जोबा को भी इन्हीं आदर्शों की घुट्टी पिलाई। 1982 में विवाह के उपरांत देवेन्द्र माझी की इसी सोच का नतीजा था कि अपने खेतों में उपजी सब्जियां लेकर जोबा माझी स्वयं इतवारी बाजार के खुदरा विक्रेताओं को बेचकर आती थीं। जबकि 1980 से लेकर 1990 तक देवेन्द्र माझी विधायक रहे थे। उनके आचार-विचार की तुलना वर्तमान समय के जनप्रतिनिधियों से की जाए, तो फर्क स्पष्ट नजर आता है। इतवारी बाजार के सब्जी विक्रेता बताते हैं कि जोबा भाभी देवेन्द्र बाबू के विधायक रहते हुए भी स्वयं सब्जियां लेकर बेचने आती थीं। आधे एक घंटे में सब्जियों की बिक्री कर तमाम लोगों की कुशलक्षेम पूछकर वे वापस लौटती थीं। इस बाबत पूछे जाने पर जोबा माझी ने कहा कि माझी साहब के विचार बेहद सुलझे हुए थे।

कौन हैं जोबा माझी

मनोहरपुर विधानसभा क्षेत्र सीट से जोबा मांझी पांच बार विधायक चुनी गयी। जोबा माझी के पति दिवंगत देवेंद्र माझी 1985 में विधायक बने थे। 14 अक्टूबर 1994 में पति देवेंद्र माझी को खोने के बाद जोबा मांझी ने राजनीति में कदम रखा था। उसके बाद 1995 के विधानसभा चुनाव में जोबा माझी पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ी और विधायक चुनी गयी। इसके बाद 2000, 2005, 2014 व 2019 में भी विधायक बनीं। इसी दौरान 1998 में जोबा माझी बिहार के राबड़ी देवी की सरकार में पहली बार आवास राज्यमंत्री बनीं थीं। झारखंड अलग होने के बाद बनी पहली भाजपा की अगुवाई वाली बाबूलाल मरांडी की सरकार में भी जोबा ने कैबिनेट मंत्री का पद संभाला था। उन्हें समाज कल्याण महिला व बाल विकास तथा पर्यटन मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। वर्ष 2005 की बात करें तो इस वर्ष भी वह फिर कल्याण, समाज कल्याण, महिला व बाल विकास एवं आवास मंत्री के पद पर काबिज हुई थी। चौथी बार चुनाव मैदान में उतरी जोबा माझी को वर्ष 2009 में पराजय का सामना करना पड़ा था। 2009 मनोहरपुर विधानसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार गुरुचरण नायक ने बाजी मारी थी। उस साल चुनाव परिणाम में जोबा माझी तीसरे नंबर पर रहीं थी।