राउरकेला की 'कलासृजनी' प्रदर्शनी में बिखरे कला के अनूठे रंग, सस्मिता और बनिता की कलाकृतियां रहीं मुख्य आकर्षण
राउरकेला। शहर के प्रमुख चित्रकला संस्थान 'जसपाल स्मृति चित्रालय' द्वारा आयोजित तीसरी चित्रकला कार्यशाला और प्रदर्शनी "कलासृजनी" का एफईटू आर्केड (FE2 Arcade) में सफलतापूर्वक समापन हो गया है। 17 और 18 अक्टूबर को आयोजित इस विशेष कला शिविर में कलाकारों ने अपनी कल्पनाओं को जीवंत आकार दिया, जबकि यह भव्य प्रदर्शनी 25 अक्टूबर तक आम दर्शकों के लिए खुली रही।
संस्थान के अध्यक्ष रमेश चंद्र पात्र ने बताया कि चित्रकला के माध्यम से समाज में कला और संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए 'जसपाल स्मृति चित्रालय' भविष्य में भी इस प्रकार की प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं का आयोजन निरंतर जारी रखेगा। इस प्रदर्शनी में विभिन्न विधाओं और विषयों पर आधारित चित्रों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कैनवास पर उतरीं सामाजिक, धार्मिक और प्राकृतिक भावनाएं
प्रदर्शनी में धार्मिक और सांस्कृतिक रंगों को बखूबी दर्शाया गया। कलाकार प्रताप कुमार पटनायक ने मां दुर्गा के 'महिषासुर मर्दिनी' रूप को रंगों के बेहतरीन तालमेल के साथ कैनवास पर उतारा। वहीं, संबलपुर की छात्रा कुमारी पूर्वीता पटनायक द्वारा बनाई गई 'अष्टभुजा नारी' की कलाकृति अपनी अनूठी विषय-वस्तु के कारण सबसे अलग और उत्कृष्ट रही, जिसमें नारी के ममतामई और रौद्र रूप का अद्भुत संतुलन दिखाया गया। इसके अलावा, रुबी कुमारी वर्मा ने सूर्यास्त की लालिमा के बीच नदी किनारे बैठे बगुला-बगुली के जोड़े के माध्यम से प्राकृतिक शांति को खूबसूरती से दर्शाया।
वन्यजीव संरक्षण का संदेश रहा विशेष आकर्षण
इस प्रदर्शनी में पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति समाज को जागरूक करने का विशेष प्रयास किया गया। कलाकारों द्वारा बनाई गई वन्यजीवों की पेंटिंग्स दर्शकों के बीच चर्चा का केंद्र रहीं। इसमें बनिता पुरोहित द्वारा जीवंत रूप में चित्रित किया गया "वन्य मृग" (हिरण) और सस्मिता पटनायक द्वारा बंदूक की गोलियों व खून के बीच इंसानी क्रूरता को बयां करता "घायल बाघ" का चित्र बेहद प्रभावशाली रहा, जिसने वन्यजीव संरक्षण के संदेश को गहराई से प्रस्तुत किया। इसके अलावा दिलीप कुमार दास, सुकन्या महांति, सस्मिता साहू, पूर्णाचंद्र मेहर, रश्मिरेखा धळ, रश्मिबाला साहू, रामशिश प्रसाद राजभर, पवित्र मोहन पात्र, सुरु माझी, प्रियंका और मनोज कुमार चौधरी जैसे दिग्गज कलाकारों की कलाकृतियों ने भी इस प्रदर्शनी को ऐतिहासिक बनाया।