कोलवासरी के मुद्दे को लेकर भाजपा बीजद आमने सामने

कोलवासरी के मुद्दे को लेकर भाजपा बीजद आमने सामने

अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ) 

तालचेर में कोलवासरी को बंद करने और बंद न करने के मुद्दे को लेकर ओड़िशा की दो प्रमुख राजनैतिक पार्टी आमने सामने है। राज्य की शत्ताधारी पार्टी बीजद इसे प्रदुषण फैलाने का कारण बता कर बंद करवा देना चाहती है इसके लिए बीजद की ओर से कोलवासरी के स्थानांतरण का विकल्प दिया गया है। तो भाजपा पार्टी इसे लोगों की जीवका का प्रश्न बनाकर रोजगार के मुद्दे पर बंद करने या स्थानांतरण का बिरोध कर रही है। 

इस मामले में प्रशासन की निष्क्रियता को लेकर दोनों गुटों के बीच तनातनी तेज हो गई है।भाजपा समर्थित घंटापाड़ा पंचायत के कोलवासेरी बंद का मुद्दा आज स्थानीय प्रशासन की चुप्पी के कारण और बढ़ गया है।  बीजद और भाजपा समर्थित प्रदर्शनकारियो ने कोलवासेरी के मुद्दे को लेकर कुछ दिन पहले उपजिलापाल को मांग पत्र दिया गया था।
इस याचिका में बीजद समर्थित घंटापाड़ा पंचायत के लोगों ने उल्लेख किया है कि संयंत्र भारी मात्रा में कोयले का उत्पादन कर रहा है जिससे धूल कण के रूप में निकलने वाली कोयला चूर्ण से उत्पन्न होने वाली प्रदूषण से स्थानीय लोग विभिन्न घातक बीमारियों से मर रहे हैं जबकि अन्य कुपोषण के कारण अपने जीवन के लिए लड़ रहे हैं, इसलिए इसे बंद कर दिया जाना चाहिए या कहीं और स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए।
वही दूसरी भाजपा समर्थित लोगों का कहना है कि कोलवासेरी संयंत्र को बंद नहीं किया जाना चाहिए या किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि यह इस संयंत्र में कार्यरत 300 परिवारो के लिए जीविका का प्रश्न है। अगर इसे बंद कर दिया जाता है या किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया जाता है, तो श्रमिक अपनी आजीविका खो देंगे।  दो समूह आज तीन दिनों तक संयंत्र के सामने बैठे रहे क्योंकि दोनों पक्षों को समाधान खोजने के लिए बुलाया गया था।
दोनो गुट आमने -सामने आ गए। इसके बाद भी दोनों गुटों को समाधान के लिए बुलाया गया पर यह मामले का कोई सौहार्दपूर्ण समाधान नहीं हुआ।आज भाजपा समर्थित गुट घंटापाड़ा में रेलवे पटरी पर धरना देकर बैठ गया और आर्थिक नाकाबंदी लगा दी।
परिणामस्वरूप तीन दिनों तक कोलवासेरी बंद पडा़ है। 
आज रेल पटरी पर धरना देने से ट्रेन द्वारा कोयला खदान से कोयला की ढुलाई बंद पड़ गई। 

दोनों गुटों के बीच हंगामे को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।  आंदोलन को 3 दिन बीत जाने के बाद भी कहा जा रहा है कि अब तक केवल दो गुटों के बीच टकराव ही बचा है, क्योंकि कोई हल नहीं निकला है.  हालांकि, राजनीतिक कारणों से कोलवासेरी बंद होने पर 300 से अधिक कर्मचारियों के पेट पर लात मारी जाएगी और इसके विपरीत अगर यह वाशरी चलती रही तो क्षेत्र के निवासी प्रदुषण के संपर्क में आकर विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त होकर आकाल मौत मर जाएंगे।  कहा जाता है कि जहां कुछ लोग इस आंदोलन में गंभीर हैं, वहीं अन्य अपने निजी हितों को साधने की कोशिश कर रहे हैं।