उच्च न्यायालय द्वारा रत्न भंडार की सूची प्रक्रिया तेज करने का निर्देश
सतीश शर्मा (उप संपादक)
कटक, 2 जनवरी - उड़ीसा उच्च न्यायालय ने पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में रखे आभूषणों और बहुमूल्य वस्तुओं की सूची (इन्वेंट्री) तैयार करने की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति से इस कार्य में तेजी लाने को कहा है।
यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन और न्यायमूर्ति एम.एस. रमण की खंडपीठ ने उस हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए दिया, जिसमें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), पुरी के अधीक्षण पुरातत्वविद् ने पुष्टि की कि रत्न भंडार का संरक्षण कार्य पूरा हो चुका है और 6 जुलाई 2025 को परिसर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) को सौंप दिया गया था।
अदालत ने कहा कि जब आंतरिक रत्न भंडार और अन्य भंडारों की मरम्मत व पुनर्स्थापन का कार्य पूरा हो चुका है, तो अब वहां सदियों से सुरक्षित रखे गए आभूषणों, वस्तुओं और बहुमूल्य संपत्तियों की मात्रा व गुणवत्ता का निर्धारण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। यह न केवल इन संपत्तियों की सुरक्षा के लिए, बल्कि पारदर्शिता के लिहाज से भी जरूरी है।
यह मामला पुरी निवासी दिलीप कुमार बराल द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) के तहत सुनवाई में है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनुप कुमार माहपात्र ने पक्ष रखा। पीठ ने कहा कि याचिका की चिंता केवल 12वीं सदी के मंदिर के संरचनात्मक संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भगवान श्री जगन्नाथ से जुड़ी आभूषणों और बहुमूल्य भेंटों की सूची तैयार करना भी इसका अहम हिस्सा है।
अदालत ने यह भी स्मरण कराया कि अतीत में 1952 और 1978 में मंदिर की बहुमूल्य संपत्तियों की सूची बनाई गई थी, जब राज्य ने मंदिर प्रशासन का दायित्व संभाला था।
उल्लेखनीय है कि 27 दिसंबर को सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति बिश्ववनाथ रथ की अध्यक्षता में गठित पर्यवेक्षण समिति को इस कार्य की निगरानी सौंपी गई है।
खंडपीठ ने समिति से अपेक्षा जताई कि वह शीघ्र सूची प्रक्रिया को सक्रिय करेगी और राज्य सरकार तथा श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन पूरा सहयोग प्रदान करेंगे। मामले की अगली सुनवाई 27 जनवरी 2026 को होगी, जब राज्य सरकार को प्रगति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है।





