संसद हमले की बरसी पर शहिदो को नमन

संसद हमले की बरसी पर शहिदो को नमन

नितिन सिन्हा(संपादक-खबरसार)

कुछ याद उन्हें भी कर लो जो लौट के घर न आए

आज के ही दिन भारतीय-संविधान के मंदिर"संसद-भवन" में वर्ष 2001 को सुबह करीब 11 बजकर 30 मिनट में अत्याधुनिक स्वचलित हथियारों और बारूद के ढेर के साथ 6 पाक परस्त आतंकवादियो ने सुनियोजित हमला किया था.

हमले को नाकाम करने की कोशिश में संसद भवन की सुरक्षा में लगी सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल सहित 8 जवानों ने शहादत दी थी।

शहीदों ने कर्तव्य परायणता की मिसाल पेश करते हुए 5 अत्याधुनिक हथियार बन्द आतंकवादियों से बहादुरी पूर्वक लड़ते हुए न केवल उन्हें मारने में कामयाब हुए थे,बल्कि संसद के अंदर सभी लोगो को सुरक्षित बचा लिया था.हमले के दौरान भारतीय सुरक्षाकर्मियों ने आत्मघाती जैकेट पहने आतंकी को संसद-भवन के प्रांगण तक घुसने ही नही दिया था.साथ ही पूरी सजगता से आतंकियों की लगभग 30 किलो बारूद से भरी कार को भी भवन के बाहरी दरवाजे पर रोक लिया था.यदि आतंकी कार को संसद भवन से टकरा पाने में सफल हो जाते तो परिणाम निसन्देह गम्भीर होते....

आइये आज संसद के रक्षक शहीद सुरक्षा कर्मियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें नमन करें.जिन्होंने संसद हमले को विफल करने के लिए अपनी जान की बाज़ी तक लगा दी थी.*

ये अलग बात है कि तत्कालीन सरकार ने उन्हें प्रतिफल में उनकी वीरता के सम्मान के साथ उन्हें मिलने वाली पेंशन बंदी का तोहफा दिया था। सोंचिये इस देश और समाज के लिए इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि से संसद और सांसदों को बचाने वाले जांबाजों को आज तक पेंशन और शहीद का दर्जा मिलने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।।