तीन दिसंबर से जुड़ी है तीन महान भारतीयो की यादे
नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार)
वैसे तो साल के 365 दिन में हर दिन का कोई न कोई अपना महत्त्व होता है, परंतु 3 दिसम्बर का दिन हम भारतीयो के लिए इन प्रमुख घटनाओ के कारण से बहुत मायने रखता है......
पहला तो आज ही के दिन भारत के प्रथम राष्ट्रपति एवम् महान स्वतन्त्रता सेनानी डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की जयंती है।
डाक्टर राजेन्द्र प्रसाद - डॉ राजेन्द्र प्रसाद (3 दिसम्बर 1884 – 28 फरवरी 1963) भारत के प्रथम राष्ट्रपति एवं महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। वे भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से थे और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय संविधान के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया था। राष्ट्रपति होने के अतिरिक्त उन्होंने भारत के पहले मंत्रिमंडल में 1946 एवं 1947 मेें कृषि और खाद्यमंत्री का दायित्व भी निभाया था। सम्मान से उन्हें प्रायः 'राजेन्द्र बाबू' कहकर पुकारा जाता है।
वहीं आज देश के सर्वाधिक युवा क्रांतिकारी अमर शहीद खुदीराम बोस की जयंती भी आज ही है।
खुदीराम बोस - खुदीराम का जन्म 3 दिसम्बर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के बहुवैनी नामक गाँव में कायस्थ परिवार में बाबू त्रैलोक्यनाथ बोस के यहाँ हुआ था। उनकी माता का नाम लक्ष्मीप्रिया देवी था। बालक खुदीराम के मन में देश को आजाद कराने की ऐसी लगन लगी कि नौवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ दी और स्वदेशी आन्दोलन में कूद पड़े। छात्र जीवन से ही ऐसी लगन मन में लिये इस नौजवान ने हिन्दुस्तान पर अत्याचारी सत्ता चलाने वाले ब्रिटिश साम्राज्य को ध्वस्त करने के संकल्प में अलौकिक धैर्य का परिचय देते हुए पहला बम फेंका और मात्र 19 वें वर्ष में हाथ में भगवद गीता लेकर हँसते-हँसते फाँसी के फन्दे पर चढ़कर इतिहास रच दिया।
वहीं हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यान चन्द का आज के ही दिन दुःखद निधन हुआ था।
मेजर ध्यानचंद - मेजर ध्यानचंद सिंह भारतीय फील्ड हॉकी के भूतपूर्व खिलाड़ी और कप्तान थे। उन्हें दुनिया के महान हॉकी प्लेयरों में से एक माना जाता है। मेजर ध्यानचंद को उनके अपने अलग तरीके से गोल करने के लिए याद किया जाता है। मेजर ध्यानचंद ने भारत को लगातार तीन बार ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलवाया था। उनकी जन्म तिथि को भारत में ‘राष्ट्रीय खेल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। मेजर ध्यानचंद को ‘हॉकी का जादूगर’ भी कहा जाता है। उन्होंने अपने खेल जीवन में एक हजार से ज्यादा गोल दागे हैं।
कहा जाता है कि जब वे हॉकी के मैदान में खेलने के लिए उतरते थे, तो गेंद मानो उनकी स्टिक से चिपक सी जाती थी। उन्हें भारतीय सम्मान पदमभूषण से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा कई प्रसिद्ध लोग समय-समय पर उन्हें ‘भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की । लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने 2014 में उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया। (साभार-शोसल मीडिया)





