सरकारी डॉक्टरों ने हड़ताल वापस ली शुक्रवार से ओपीडी सेवाएं सामान्य
सतीश शर्मा (उप संपादक)
राज्य के डॉक्टरों द्वारा अपनी 10 सूत्री मांगों के लेकर चलाया जा रहा आंदोलन राज्य सरकार के साथ बातचीत के बाद आज गुरुवार को समाप्त हो गया है। डॉक्टरों के संगठन ओडिशा मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (OMSA) ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग के साथ हुई विस्तृत चर्चा के बाद आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की।
यह आंदोलन ओडिशा मेडिकल सर्विस एसोसिएशन (OMSA) के नेतृत्व में नवंबर से जारी है। डॉक्टरों ने अपनी 10 सूत्री मांगों के समर्थन में आंदोलन शुरू किया था, जिसमें बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरने की मांग भी शामिल है। ओपीडी बहिष्कार से पहले डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया था।
सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टर 26 दिसंबर से ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार कर रहे हैं। पहले यह बहिष्कार प्रतिदिन एक घंटे का था, जिसे 5 जनवरी से सुबह 9 बजे से 11 बजे तक दो घंटे कर दिया गया। हालांकि, आपातकालीन सेवाएं, भर्ती मरीजों की देखभाल और सर्जरी सेवाएं निर्बाध रूप से जारी रहीं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री मुकेश महालिंग द्वारा ड्यूटी पर लौटने की अपील और मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के आश्वासन को डॉक्टर संघ ने ठुकरा दिया, जिसके बाद सरकार ने एस्मा ESMA लागू किया। पर डॉक्टरों ने ओपीडी बहिष्कार जारी रखा।
गुरुवार को डॉक्टर एसोसिएशन के प्रतिनिधियों और स्वास्थ्य मंत्री के बीच हुई बैठक में डॉक्टरों की सेवा शर्तों और कार्यस्थल से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। मंत्री महालिंग ने बताया कि डॉक्टरों की मांगों की जांच के लिए पहले ही एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जा चुकी है, जो सभी मांगों पर विस्तार से विचार कर जल्द ही सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि समिति की सिफारिशों को लागू किया जाएगा। इसी भरोसे के बाद डॉक्टरों ने हड़ताल समाप्त करने का फैसला किया।
ओडिशा मेडिकल सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. किशोर मिश्रा ने बातचीत को सकारात्मक और सार्थक बताते हुए कहा कि सरकार ने मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया है। कई मांगों पर शीघ्र निर्णय लिए जाने की उम्मीद है। फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया गया है और शुक्रवार से स्थिति सामान्य होने की संभावना है।
इस फैसले से राज्य के मरीजों को बड़ी राहत मिली है। ओडिशा मेडिकल सर्विस एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि शुक्रवार से राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह सामान्य हो जाएंगी।
गौरतलब है कि सरकारी डॉक्टरों ने अपनी दस सूत्री मांगों को लेकर 26 दिसंबर से रोजाना एक घंटे का ओपीडी बहिष्कार शुरू किया था, जिसे बाद में दो घंटे तक बढ़ा दिया गया। इससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही थीं।
डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त कराने के लिए राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं में छह महीने के लिए आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) भी लागू किया था, इसके बावजूद डॉक्टर आंदोलन पर डटे रहे थे। अब हड़ताल वापस लिए जाने से राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर पटरी पर लौटने की उम्मीद है।
डॉक्टरों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
केंद्रीय कर्मचारियों के समान वेतनमान, लेवल-15 की बाध्यता हटाने की मांग।
सभी संवर्गों का अनुपातिक पुनर्गठन।
सुपर स्पेशियलिस्ट, स्पेशियलिस्ट और डिप्लोमा धारक चिकित्सकों को अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन।
केबीके और आदिवासी क्षेत्रों में सेवा के बाद स्थानांतरण/एक्जिट नीति।
नियमित वार्षिक भर्ती और समय पर पदोन्नति।
ओडिशा मेडिकेयर एक्ट-2008 में संशोधन कर डॉक्टरों पर हमले को गैर-जमानती अपराध घोषित करना।
सभी अस्पतालों में 24×7 सशस्त्र सुरक्षा व्यवस्था।
अस्थायी नियुक्तियों का नियमितीकरण।
संविदा व अस्थायी सेवा अवधि को नियमित सेवा में जोड़ना।
सभी स्वास्थ्यकर्मियों के लिए समग्र स्वास्थ्य बीमा।

