मुद्दा बना कल्याण मंडप -जबाब देगा कौन
जर्जर व कचरा का ढेर बनता राजगांगपुर का कल्याण मंडप ,पत्रकारों व स्थानीय लोंगों द्वारा बारम्बार स्थानीय प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करने के बावजूद मामला जस कि तस बनी हुई है
रामप्रवेश चौधरी ( संवाददाता )
ओडिशा में सुंदरगढ़ जिला अंतर्गत राजगांगपुर शहर में बने कल्याण मंडप का मामला मिडिया में बार-बार उठता आया है ,फिर भी जिला प्रशासन के कानों में जूँ नहीं रेंग रही है | अबतक ५० लाख से ज्यादा खर्च हो चुके इस कल्याण मंडप में अभी तक किसी प्रकार का कल्याणकरी कार्य संपन्न नहीं हुआ है |
राजगांगपुर नगर पालिका द्वारा निर्मित कल्याण मंडप बन कर साल भर ही हुए होंगे,पर अभी से इसकी गुद्वात्ता पर प्रश्न उठने लगे है ;

कल्याण मंडप कि दीवारों में दरार पड़ने लगे है ,तो खिडकियों के पल्ले नदारत नज़र आ रहे है |
राजगांगपुर कि जनता पत्रकारों के माध्यम से स्थानीय प्रशासन के समक्ष यह प्रसन्न उठा रही है कि गुणवत्ता विहीन इस कल्याण मंडप में किसकी इज़ाज़त से जनता कि गाढ़ी कमाई का एक मोटी रकम खर्च कर दिया गया |
स्थानीय नगरपालिका द्वारा कार्य कि गुणवत्ता जाँच किये बिना ही क्या आँखें मूंद कर ठेकेदार को इसका भुगतान कर दिया गया |स्थानीय पत्रकारों द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता के उठाया गया था ,पर एक ओर जहाँ प्रशासन चीर निंद्रा में सोई है वहीं ऐसे ठेकेदारों के प्रति कार्यवाही न होने से इनका मनोबल बढ़ रहा है |

हमारे संवाददाता द्वारा कि गई जाँच-पड़ताल के बाद जो तथ्य सामने आये है उससे मालूम होता है कि कल्याण मंडप कि जर्जर अवस्था और परिसर में पसरी गन्दगी कि वजह से किसी मांगलिक कार्य को यहाँ संपन्न करने के लिए लोग इस जगह को नापसंद कर रहे है |शायद यही वजह है कि लॉक-डाउन हटने के बाद सादियों कि बाढ़ सी आ गई थी | मेहमानों के लिए बड़े होटलों ,कल्याण मंडपों ,से लेकर छोटे-मोटे बिद्यालायों में भी जहाँ जगह कम पड गई थी,वहीं इतने बड़े कल्याण मंडप को लोग आपनी सूचि में शामिल नहीं किये |
इसके लिए जबाब कौन देगा | यह देखना दिलचस्प होगा कि एक बार फिर पत्रकरों द्वारा यह मुद्दा उठाया जा रहा है ,स्थानीय प्रशासन इसपर कोई कारवाई करती है या चीर निद्रा में सोई रहती है |





