भारत के पहले क्रांतिकारी कलमकार अमर शहीद मौलाना मोहम्मद बाक़ीर
भारत देश के पहले क्रांतिकारी कलमकार अमर शहीद मौलाना मोहम्मद बाक़ीर साहब को क्रांतिकारी सलाम !
क्या आपको पता है कि भारतीय स्वतंत्रता-संग्राम में शहादत सिर्फ उन वीरों की नहीं हुई थी,जिन्होंने हथियारों के दम पर यह लड़ाई लड़ी थीं। कलम से आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले भी कई शख्स भी इस लड़ाई में शहीद हुए थे.?
*आइये ऐसे ही एक शख्स से आपका परिचय कराएं.*
मौलाना मोहम्मद बाक़ीर देश के पहले ऐसे पत्रकार थे, जिन्होंने 1857 में स्वाधीनता के पहले संग्राम में अपने प्राण की आहुति दी थी।*
मौलाना साहब अपने समय के बेहद निर्भीक पत्रकार रहे थे। वे उस दौर के लोकप्रिय *'उर्दू अखबार दिल्ली'* के संपादक थे। दिल्ली और आसपास अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ जनमत तैयार करने में इस अखबार की बड़ी भूमिका रही थी। मौलाना साहब अपने अखबार में अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति के विरुद्ध और उनके खिलाफ लड़ रहे सेनानियों के पक्ष में लगातार लिखते रहे। अंग्रेजों ने उन्हें बड़ा खतरा मानकर गिरफ्तार किया और सज़ा-ए-मौत दे दी। उन्हें तोप के मुंह पर बांध कर उडा दिया गया। जिससे उनके वृद्ध शरीर के परखचे उड़ गए।
*इसे देश का दुर्भाग्य कहिए कि आज़ादी की लड़ाई के इस शहीद पत्रकार को न कभी देश के इतिहास ने याद किया और न देश की पत्रकारिता ने।*
इतिहास के इस विस्मृत महानायक को हमारा कोटि-कोटि नमन !
नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार)





