प्रिया प्रकाश vs कोबरा कमांडो

प्रिया प्रकाश vs कोबरा कमांडो

नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार) 

आज फिर आपको वर्ष 2016 की दो बहुचर्चित हंसी की याद दिलाना चाहूंगा..

जिसमें एक बनावटी मुस्कुराहट थी,जो रुपहले पर्दे से निकली थी और उसने तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को अपना दीवाना बना दिया था.. लेकिन उसमें मैं शामिल नही था,,*वही एक 100 फीसदी खालिस मुस्कुराहट थी,जो बस्तर के डब्बा मारका जंगल से बाहर आई थी,,वह मुझ जैसे कुछ सौ या कुछ हजार लोगो को इतनी पसंद आई थी, कि उसका वर्णन शब्दों में मैं आज भी नही कर सकता हूं,,....

क्योंकि..

और भी गम हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा,
राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा.."

वैसे जिस तरह मुस्कुराने का सभी का अपना अलग अंदाज होता,,उसी तरह उसे पसन्द करने वालो की भी अपनी सोंच होती है..

"कोई जल्दी ही मिट जाने वाली बनावटी मुस्कुराहट पर मर मिटता है.."
"तो कोई जिंदगी भर याद रहने वाली दिलेर हंसी का दीवाना हो जाता है.."

उसी तरह जिस तरह ..

कोई फकत झूठी शोहरत के लिए मुस्कुरा लेता है,तो कोई जिंदगी से जंग जीतकर हंस लेता है..

2016 की ये जो दो मुस्कुराटें है,,ये भी ऐसी ही थी,एक थी मशहूर फ़िल्म अभिनेत्री प्रिया प्रकाश की,, जो कुछ ही मिनटों में सुनहरे परदे से सोशल मीडिया में वायरल होते हुए लाखों और करोड़ो लोगो को पसंद आ गई थी,,तो दूसरी तरफ थी,,एक घायल कोबरा जवान की हंसी,,जिसे डब्बा मारका जंगल से बाहर आने में ही तीन दिन लग गए थे,,.. उसने पहले अपने उस साथी को कायल कर दिया था,,जो उस जंग में उसके साथ नक्सलियों से लड़ रहा था और सुरक्षित था।। सम्भवतः उसी ने अपने मोबाइल से उसकी फोटो खींची और जब तीन दिन बाद मोर्चे पर डटे कोबरा जवान जब वापस कैम्प पहुंचे तब वह उसे वायरल कर पाया था।। दर्जनों घायल और तीन शहीद जवानों के बीच इस खून से लथपथ घायल जवान निश्चिन्त हंसी बता रही थी,कि उसने आज जिदंगी से जंग तो जीत ली है,कल वो फिर उनकी (नक्सलियों)की दी गई,नई चुनौती से लड़ने जरूर आएगा.... 

4 मार्च 2016 के दिन छत्तीसगढ़  के सुकमा जिले के किस्टाराम के डब्बा-मारका जंगल में घातक नक्सल हमले(मुठभेड़) में 350 हथियार बंद नक्सलियों के एंबुश में घिर कर लड़ रहे करीब 125 कोबरा कमांडों ने तीन दिन तक उस स्थान पर मोर्चा सम्हाले रखा था।। इस बीच उनके तीन कमांडों शहीद भी हो गए थे और दर्जन भर अन्य जवान घायल भी हुए थे,घायलों में एक बुरी तरह आहत हुए,कोबरा कमांडो की जाबांजी और खून से लथपथ होने के बावजूद उसके चेहरे की वीरोचित मुस्कुराहट ने भले ही अभिनेत्री की तुलना में तब कम प्रसिद्धि हासिल की थी.लेकिन अभिनेत्री की हंसी फिल्मी पर्दे पर बनावटी प्रेम की उपहास मात्र थी,तो घायल कमांडो की मुस्कुराहट ताउम्र हम इंसानो को यह प्रेरणा देने वाली थी. *"कि जिंदगी की जंग कितनी भी कठिन क्यों न हो उसे जीतने का जुनून,आपको कभी निराश नही होने देगा"*..

अतः बहुतों को अभिनेत्री प्रिया प्रकाश के कृत्रिम मुस्कुराने का अंदाज अच्छा लग सकता है,पर मुझ जैसों के लिए दिल जीतने वाली मुस्कुराहट तो हमारी कोबरा फोर्स का वो जवान ही दे पाया था,जो डब्बा मारका जंगल की लड़ाई में पूरी बहादुरी से लड़ कर घायल हुआ था,,उसने दो खतरनाक लड़ाइयां एक साथ लड़ी थी,पहला दुश्मन नक्सलियों से दूसरा मुठ्ठी में बंद रेत की तरह पल_पल सरकती अपनी जिंदगी से,,अच्छी बात यह थी कि तीन दिन तक चली इन दोनो लड़ाईयों में वह दोनो तरह की जंग जीत चुका था,,......

"हसीं तो था उनके मुस्कुराने का वो अंदाज़ भी,लेकिन-
हम जिस पर मर मिटे वो अदा ही कुछ और थी"

डब्बा-मारका 2016 के शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि