नियंत्रण से वाहर हालात की वजह से नहीं ले पाए दाखिला सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
सुप्रीम कोर्ट ने आज (5 दिसंबर) तमिलनाडु के तीन NEET-UG उम्मीदवारों को राहत दी, जिन्होंने टेक्निकल दिक्कतों की वजह से तय समय में फीस का भुगतान पूरा नहीं कर पाने की वजह से अपनी MBBS सीट खो दी थी। न्याय मूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की बेंच ने छात्रों को बुधवार (10 दिसंबर) तक भुगतान करने की इजाज़त दी है, जिससे उन्हें दाखिला पाने का मौका फिर से मिल गया। शुरू में, बेंच को यकीन नहीं हुआ और उसने कहा कि अगर राहत मुख्य रूप से पैसे की दिक्कतों की वजह से दी जाती है, तो यह मुश्किलों का पिटारा खोल देगा। हालांकि, जब कोर्ट को बताया गया कि फीस भुगतान की देरी इस वजह से हुई क्योंकि भुगतान की अंतिम तिथि छुट्टी के दिन भी थी, तो मामले के अजीब हालात को देखते हुए, बेंच ने साफ किया कि इस आदेश को आगे के मामलों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य को निर्देश दिया कि वह उम्मीदवारों को मैनेजमेंट कोटे की खाली सीटों में से सीटें दे, ताकि यह पक्का हो सके कि वे अपने नियंत्रण से बाहर के हालात की वजह से दाखिला लेने से वंचित न रहें। याचिकाकर्ता में से एक, सख्सने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा इस आधार पर खटखटाया था कि भुगतान की आखिरी तारीख बैंक छुट्टी के दिन थी और इसलिए, भुगतान पूरा नहीं हो सका। जबकि बाकी दो उम्मीदवारों ने पैसे की दिक्कतों की वजह से भुगतान पूरा नहीं कर सके। याचिका कर्ताओं में से एक, शिल्पा सुरेश ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उन्हें राहत देने से मना कर दिया था। याचिकाकर्ता के मुताबिक, पैसे की दिक्कतों की वजह से वह भुगतान नहीं कर सकीं।





