राउरकेला का एथलेटिक्स हॉस्टल सपनों की उड़ान या संघर्ष की नई राह
सतीश शर्मा (उप संपादक)
पश्चिम ओड़िशा के खेल मानचित्र पर राउरकेला का नाम लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। हॉकी की धरती के रूप में पहचान बना चुके इस औद्योगिक शहर को हाल के वर्षों में एक और बड़ी उपलब्धि मिली—सिंथेटिक ट्रैक से सुसज्जित बिरसा मुंडा एथलेटिक्स स्टेडियम। पश्चिम ओड़िशा के 11 जिलों में यह अपनी तरह का एकमात्र आधुनिक एथलेटिक्स स्टेडियम है। अब राज्य सरकार ने यहां एथलेटिक्स छात्रावास की आधिकारिक घोषणा भी कर दी है। पहली नजर में यह निर्णय क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि और उम्मीद की नई किरण प्रतीत होता है।
फिलहाल इस हॉस्टल में 25 युवा एथलीट प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन युवाओं की आंखों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने का सपना है। वे हर दिन ट्रैक पर पसीना बहा रहे हैं, ताकि भविष्य में राउरकेला और ओड़िशा का नाम रोशन कर सकें। इस हॉस्टल का लाभ केवल इन 25 खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां अभ्यास करने आने वाले सौ से अधिक एथलीट भी इससे प्रेरित और लाभान्वित हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स कोच शिब मिश्र और उनके सहयोगी प्रशिक्षकों की देखरेख में ये खिलाड़ी अपने सपनों को आकार देने में जुटे हैं।
लेकिन इस चमकदार तस्वीर का दूसरा पक्ष कहीं अधिक गंभीर और चिंताजनक है। जिस एथलेटिक्स हॉस्टल की घोषणा खिलाड़ियों के लिए सुविधाओं का नया द्वार खोलने वाली थी, वही अब कई कठिनाइयों का कारण बनती दिखाई दे रही है।
लगभग दो वर्ष पहले, जब हॉस्टल की केवल संभावना थी, तब कोच शिब मिश्र कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को लेकर यहां अभ्यास शुरू कर चुके थे। आधिकारिक मान्यता न होने के बावजूद खिलाड़ी स्टेडियम परिसर में रहकर नियमित प्रशिक्षण लेते थे। सुविधाओं की कमी थी, लेकिन जज़्बे की कमी नहीं थी। इन्हीं सीमित संसाधनों के बीच प्रतीक महाराणा सहित कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर यह साबित किया कि राउरकेला में एथलेटिक्स की अपार संभावनाएं हैं।
विडंबना यह है कि हॉस्टल की आधिकारिक घोषणा (मार्च महीने) के बाद खिलाड़ियों की समस्याएं कम होने के बजाय बढ़ गईं। पहले खिलाड़ी स्टेडियम परिसर में रहते थे, जिससे अभ्यास और आराम के बीच संतुलन बना रहता था। अब उन्हें लगभग दस किलोमीटर दूर पानपोष हॉकी हॉस्टल में रहने भेज दिया गया है। भोजन और आवास की व्यवस्था वहीं की गई है। परिणामस्वरूप खिलाड़ियों को प्रतिदिन सुबह और शाम अभ्यास के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
खेल विज्ञान कहता है कि एक खिलाड़ी की ऊर्जा का हर अंश उसके प्रदर्शन से जुड़ा होता है। ऐसे में रोजाना आने-जाने में समय और ऊर्जा की बर्बादी उनके प्रशिक्षण को प्रभावित करना स्वाभाविक है। यह केवल असुविधा नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब पता चलता है कि खिलाड़ियों को अभी तक आवश्यक खेल उपकरण, गुणवत्तापूर्ण स्पाइक्स, आधुनिक जिम और वैज्ञानिक प्रशिक्षण सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। बिना इन मूलभूत सुविधाओं के किसी खिलाड़ी से राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं कहा जा सकता।
कोच शिब मिश्र का कहना है कि वे कई बार संबंधित अधिकारियों को इन समस्याओं से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। उनके अनुसार, इसी महीने रांची में होने वाली फेडरेशन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में यहां के पांच खिलाड़ी भाग लेने जा रहे हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद खिलाड़ी और प्रशिक्षक पूरी निष्ठा के साथ तैयारी कर रहे हैं।
वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि खिलाड़ियों के लिए समय पर पौष्टिक भोजन उतना ही आवश्यक है जितना नियमित अभ्यास। वर्तमान व्यवस्था में खिलाड़ी सुबह अभ्यास के बाद पानपोष लौटकर नाश्ता करते हैं और कुछ समय बाद भोजन करते हैं। शाम को भी यही क्रम चलता है। यह व्यवस्था किसी पेशेवर खेल प्रशिक्षण प्रणाली के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिरसा मुंडा स्टेडियम जैसे विशाल परिसर में खिलाड़ियों के रहने और भोजन की व्यवस्था संभव है, तो उन्हें प्रतिदिन लगभग 40 किलोमीटर की थकाऊ यात्रा क्यों करनी पड़ रही है? सरकार खिलाड़ियों को आवश्यक सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध कराने में देरी क्यों कर रही है?
कुछ अधिकारियों द्वारा बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को भुवनेश्वर के हाई परफॉर्मेंस सेंटर भेजने की सलाह दी जाती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या राउरकेला जैसे खेल संभावनाओं से भरपूर क्षेत्र को मजबूत करने के बजाय उसकी प्रतिभाओं को दूसरे शहरों की ओर भेजना उचित रणनीति है?
सुंदरगढ़ और पश्चिम ओड़िशा लंबे समय से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की धरती रहे हैं। हॉकी से लेकर एथलेटिक्स तक यहां की मिट्टी ने देश को अनेक खिलाड़ी दिए हैं। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि राउरकेला के एथलेटिक्स स्टेडियम और हॉस्टल को मजबूत किया जाए, ताकि यहां के खिलाड़ियों को अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय सुविधाएं मिल सकें।
यदि सरकार सचमुच खेलों को बढ़ावा देना चाहती है, तो उसे केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम परिसर में आवास, पौष्टिक भोजन, आधुनिक जिम, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और उच्च स्तरीय उपकरणों की तत्काल व्यवस्था करनी होगी। क्योंकि प्रतिभा केवल सपनों से नहीं, बल्कि सही सुविधाओं और निरंतर समर्थन से विश्व मंच तक पहुंचती है।





