कैसे अभियारण्य से परिपूर्ण धरा खानो में तबदील हो गई
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ:अंगुल)
ओडिशा राज्य के अंगुल जिले में स्थित तालचर जंगल, से परिपूर्ण एक प्राकृतिक वातावरण युक्त सुंदर स्थल हुआ करता था।
इनमें पिकनिक स्पाट , नेचर पार्क और कई अन्य खूबसूरत पार्क शामिल थे।
यहाँ इतने जंगल थे कि राजा राजवाडे समय-समय पर शिकार करने आते थे और विभिन्न जंगली जानवरों के शिकार का आनंद लेते थे। ब्राह्मणी नदी के किनारे सुंदर अभयारण्य का हुआ करता था।
आज यहाँ चारो तरफ कोयले ही कोयले और आसमान काली धूल से ढ़की नजर आती है।
जब यह पता चला कि यहाँ कि धरा अपनी कोख में असीमित कोयला धारण किए हुए है तो राज्य के स्वामित्व वाला उद्यम खनन का केंद्र बन गया । नतीजतन, हजारों जंगल और खेत तबाह हो गए, वन्यजीव और पशु प्रजातियां विलुप्त होती गई, और आज की पीढ़ी के मनोरंजन के लिए कोई पार्क या पिकनिक स्पाट नहीं है। एक समय ऐसा भी था जब प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए क्षेत्र के बाहर से लोग यहां आते थे। लेकिन अब तालचर के लोग मनोरंजन के लिए बाहर जा रहे हैं। वर्तमान में केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न राज्य के स्वामित्व वाले उद्यमों से करोड़ों रुपये का राजस्व एकत्र कर रही हैं, लेकिन इसका आनंद लेने के लिए यहाँ कोई पिकनिक स्पाट या पार्क नहीं है। तालचर में एक मजबूत प्रशासनिक और राजनीतिक इच्छाशक्ति और ईमानदारी की कमी के कारण खनिज संपदा, सीएसआर और धन का सटिक उपयोग नहीं किया जा रहा है।
परिणामस्वरूप तालचर के लोगों को उनके मूल अधिकारों और हर क्षेत्र से वंचित किया जा रहा है। तालचर निवासियो की इस दिल दहला देने वाली कहानी को सुनने वाला कोई नही।





