बस्ती डायट में कार्यशाला का आयोजन
डायट बस्ती में परिषदीय विद्यालय में नामांकन, ठहराव एवं गुणवत्ता को बढाने और उनमें आने वाली चुनौतियों पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बस्ती जिले के आदर्श प्राथमिक विद्यालय मूडघाट के राष्ट्रपति पुरष्कार प्राप्त प्रधानाध्यापक डा.सर्वेष्ट मिश्र , भारती शुक्ला प्राथमिक विद्यालय चमरहिया, हर्रैया बस्ती, ललन चंद त्रिपाठी संविलियन विद्यालय वेदपुर नचना, दुबौलिया ने संदर्भ दाता के रूप में अपने विचार और अनुभव प्रस्तुत किया।
डायट प्राचार्य एवं उप शिक्षा निदेशक बस्ती मंडल संजय कुमार शुक्ल, कार्यशाला की नोडल प्रवक्ता वंदना चौधरी तथा सह नोडल प्रवक्ता वर्षा पटेल के मार्ग दर्शन में कार्य शाला का शुभारंभ परंपरा के अनुरूप दीप प्रज्ज्वलन, एवं माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया गया।
अपने उद्बोधन में डायट प्राचार्य संजय कुमार शुक्ल ने कहा कि शिक्षा और विकास समानुपाती होता है। सपनों की गरीबी शिक्षा के उत्कर्ष और विकास को बाधित करता है। आप स्वयं सपना देखिये तथा बच्चों को सपना देखना सिखाइये। वर्तमान युग कृत्रिम बौद्धिकता का युग है। यदि हम अपनी बौद्धिक क्षमता को नहीं बदलेंगे तो हम मुख्य धारा की प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाएंगे। स्वयं को आने वाली चुनौतियों को समझते हुए उसके अनुरूप अपने को बदलते हुए स्वयं तथा बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करें।

कार्यशाला से प्राप्त अनुभव का उपयोग विद्यालय में व्यावहारिक स्तर पर क्रियान्वित करें। वहीं वंदना चौधरी ने कहा कि कार्यशाला से अध्यापक को अपने अनुभव और ज्ञान को अद्यतन कर शिक्षण में उपयोग करने की क्षमता और प्रेरणा मिलती है। डॉ सर्वेष्ट मिश्र ने नामांकन बढाने के लिए अभिभावकों के साथ आत्मीय संबंध, सामुदायिक सहयोग, विद्यालय परिवेश स्वच्छ और सुंदर बनाने, विद्यालय के अच्छे कार्य का प्रचार प्रसार तथा अच्छी शिक्षा को उदाहरण देकर स्पष्ट किया। भारती शुक्ला ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को बढाने के लिए सकारात्मक दृष्टि कोण के साथ प्राथमिक शिक्षा, पाठ्य पुस्तक, समाज, अभिभावकों के उद्देश्य को समझने तथा उनके अनुरूप विद्यार्थियों को संतान मानकर शिक्षण कार्य करने का आग्रह किया। संदर्शिका, गणित तथा विज्ञान किट, प्रिंट रिच मटीरियल, पुस्तकालय की पुस्तकों, आन लाइन दीक्षा, रीड एलांग, निपुण लक्ष्य एप का प्रयोग कर शिक्षा की गुणवत्ता को प्राप्त किया जा सकता है। शिक्षण को रुचिकर बनाने के लिए योग और प्राणायाम का प्रयोग किया जा सकता है। इको क्लब के द्वारा बच्चों को सक्रिय और आत्मनिर्भर बनाने में सहायता मिलती है। बच्चों को संस्कार देने की आवश्यकता है। कार्यशाला में कुल साठ अध्यापकों ने सहभागिता किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।





