सिरेमिक इंजीनियरिंग में पाँच दिवसीय सार्ट टर्म कोर्स की शुरुआत
प्रेस विज्ञप्ति: एनआईटी राउरकेला

एनआईटी राउरकेला के सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग ने ‘सिरेमिक उत्पादों के निर्माण प्रक्रिया में कमियों की पहचान और नियंत्रण - लागत, ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन पर प्रभाव’ विषय पर पंडा-समाद्दार-सीन्हा स्मृति पांच दिवसीय शॉर्ट-टर्म कोर्स का आयोजन किया। यह कार्यक्रम 20 से 25 फरवरी, 2025 तक भुवनेश्वर बहेरा ऑडिटोरियम, एनआईटी राउरकेला में चल रहा है। इस कोर्स में 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं, जिनमें अकादमिक, औद्योगिक, वैज्ञानिक और विभिन्न संस्थानों के छात्र शामिल हैं।
कार्यक्रम समन्वयक, प्रो. देबाशिष सरकार ने उद्घाटन सत्र की शुरुआत स्वागत भाषण से की। प्रो. एस. के. प्रतिहार (डीन, प्रायोजित अनुसंधान औद्योगिक परामर्श और सतत शिक्षा) ने फिर सिरेमिक निर्माण के महत्वपूर्ण पहलुओं और औद्योगिक दक्षता को बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने में इसके योगदान पर चर्चा की। इसके बाद, विभागाध्यक्ष प्रो. रणब्रत मजूमदार ने सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग और इसके विभिन्न पाठ्यक्रमों का अवलोकन प्रस्तुत किया। प्रधान समन्वयक प्रो. शांतनु भट्टाचार्य ने कार्यक्रम में अपना संबोधन दिया और कहा कि यह शॉर्ट-टर्म कोर्स डॉ. जे. डी. पंडा, प्रो. बी. एन. समाद्दार और प्रो. आर. के. सिन्हा की अमूल्य योगदानों को सम्मानित करने के लिए समर्पित है, जिनकी संयुक्त प्रयासों ने सन् 1994 में सिरेमिक इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना और 1994-2000 के दौरान विभाग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि यह व्याख्यान श्रृंखला उनके योगदानों को मनाने और यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन की गई है कि ताकि यह सिरेमिक इंजीनियरिंग में प्रगति को प्रेरित करता रहे।
कार्यक्रम में सम्मानित अतिथि (गेस्ट ऑफ ऑनर) डॉ. निखिल रंजन भट्टाचार्य (फ्रीलांस कंसल्टेंट, रिफ्रेक्टरी) ने इस तरह के कोर्सों की महत्ता पर प्रकाश डाला, जहाँ अकादमी और उद्योग विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हम एक सतत भविष्य की दिशा में काम कर रहे हैं। डॉ. देबाशिष देबाशीष भट्टाचार्य (आईआईटी मद्रास में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस) ने भी उद्घाटन सत्र में सम्मानित अतिथि के रूप में भाग लिया और इस विषय पर मूल्यवान विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारत का सिरेमिक उद्योग, जिसका मूल्यांकन लगभग 7 बिलियन डॉलर है और जो वैश्विक बाजार का 5-7% हिस्सा रखता है, मुख्य रूप से सिरेमिक टाइल्स (लगभग 95%) द्वारा संचालित है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे यह उद्योग उन्नत सिरेमिक्स जैसे चिकित्सा, टूलिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स अनुप्रयोगों में विस्तार कर रहा है, इस क्षेत्र में कई अवसर सामने आएंगे।
मुख्य अतिथि श्री बिरेंद्र प्रसाद (प्लांट हेड, आरएचआई मैग्नेसिटा इंडिया रिफ्रेक्टरीज़ लिमिटेड, राजगांगपुर) ने इस अवसर पर उद्घाटन भाषण दिया। उन्होंने कहा कि उच्च स्तर के सिरेमिक्स का निर्माण एक चुनौती है, जिसमें कई कमियां शुरूआती प्रोसेसिंग प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होते हैं। फायरिंग के बाद की सही ढंग से न बनने वाले उत्पाद (जो एक महंगे और ऊर्जा-गहन प्रक्रिया के बाद बनते हैं), उत्पाद की लागत और पर्यावरणीय प्रभावों को बढ़ा देती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह कोर्स नए तकनीकी उपायों का पता लगाएगा, जो पहले से फायर किए गए सिरेमिक्स में दोषों की पहचान और नियंत्रण में उपयोगी होंगे।
प्रो. के. उमामहेश्वर राव, निदेशक, एनआईटी राउरकेला ने आयोजक टीम को इस शॉर्ट-टर्म कोर्स की मेज़बानी के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों को उन नवाचारों से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होगी, जो सिरेमिक उत्पादन में ऊर्जा खपत, ईंधन उपयोग, कार्बन उत्सर्जन और निर्माण लागत को घटाने में मदद कर सकते हैं।
कार्यक्रम का समापन पांच दिवसीय शॉर्ट-टर्म कोर्स के लिए निर्धारित व्याख्यानों की श्रृंखला की समीक्षा के साथ हुआ। कोर्स के आयोजन समिति के अन्य सदस्य डॉ. अनुपम मिश्रा (सचिव), श्री अरविंद कुमार (कोषाध्यक्ष) और श्री शास्वत मिश्रा (छात्र समन्वयक) हैं। विभाग के छात्र; कुमार संकेत, अभिषेक और अन्य पीएचडी विद्वानों के साथ-साथ विभाग के कर्मचारियों ने कार्यक्रम का संचालन करने के लिए स्वेच्छा से भाग लिया।





