सरस्वती शिशुमंदिर के वार्षिकोत्सव में देखने को मिली भारतीय सभ्यता और संस्कृति
बंडामुंडा़ "बी" सेक्टर स्थित सरस्वती शिशुमंदिर का 24 वां वार्षिक उत्सव मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियो द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान छात्रों ने विद्या की देवी माँ सरस्वती बंदना और वैदिक मंत्रो का उच्चारण कर रहे थे, छात्रों ने सामूहिक रूप से गायत्री मंत्र का जाप भी किया। गुरू बंदना की और अतिथियो के स्वागत में स्वागत गीत गाकर कार्यक्रम को आगे बढाया। अतिथियो को अंग वस्त्र और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।
अतिथि परिचय विद्यालय के प्रधानाचार्य गिरधारी दलई ने दिया। प्रधानाचार्य ने विद्यालय परिचालन कमिटी के समक्ष वार्षिक विवरणी प्रस्तुत की। उन्होने कहा बीते दसवीं की परीक्षा में 100% परिणाम का होना विद्यालय की उपलब्धि है। 31 विद्यार्थीयो ने दसवीं की परीक्षा दी थी और सभी उत्तीर्ण हुए जिसमें से दो छात्र 90% से ज्यादा, तीन छात्र 80% से अधिक, 17 छात्र 70% से अधिक, 8 छात्र 50% से अधिक और एक छात्र 40% से अधिक नंबर से उतीर्ण होकर विद्यालय का मान बढ़ाया है।
प्रधानाध्यापक श्री दलइ ने विद्यालय के बिषय में बताया कि बंडामुंडा़ "बी"सेक्टर में सरस्वती शिशुमंदिर का शुभारंभ सन् 1998 को रामनवमी तिथि में किया गया था 22 छात्रों को लेकर आरंभ किया गया स्कूल में आज 300 से अधिक छात्र है। इस स्कूल में छात्रों को किताबी शिक्षा के अलावा शारीरिक,मानसिक, बौधिक, शिक्षा भी दी जाती है,छात्रों को आधुनिक कम्प्यूटर शिक्षा भी दी जाती है।
उन्होने आगे कहा कि स्कूल को सुचारु रूप से चलाने के लिए समय समय पर सामाजिक सहयोग मिलता है।उन्होने लायंस क्लब द्वारा शिशु उद्यान और कम्प्युटर की सुविधा उपलब्ध कराने का उदाहरण देते हुए कहा कि कुछ समाज सेवी लोग, संस्था के सहयोग से स्कूल का परिचालन कुशलता पूर्वक किया जा रहा है।
छात्रों द्वारा प्रस्तुत की गई विभिन्न प्रकार के संदेशात्मक,मनमोहक नृत्य ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिया। पूरे कार्यक्रम में वैदिक पद्धति, संस्कृत स्लोक, और भारतीय संस्कृति की अनुपम छटा देखने को मिली।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विरमित्रापुर विधायक शंकर ओराम, सम्मानित अतिथि लायंस क्लब के वरूण कुमार, स्कूल परिचालन कमिटी सदस्य मनोज कुमार पंडा,सर्गीपाली सरकारी स्कूल के अवकाश प्राप्त शिक्षक व समाजसेवी रोहितास महंत, बंडामुंडा़ महाविद्यालय के अवकास प्राप्त व्यख्याता पिताम्बर राउत, एवं गुरूकुल संस्कृत विद्यालय के शिक्षक डाक्टर उमाकांत पंडा़ मुख्य वक्ता थे





