मंगला किसान कि कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह
रामप्रवेश चौधरी (संवाददाता)
बीजू जनता दल के राज्य उपाध्यक्ष तथा पूर्व मंत्री, सांसद, विधायक मंगला किसान की कार्यशैली पर प्रश्न उठने लगे हैं, जिससे बीजद की एकजुटता में दरार पड़ने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
वहीं दूसरी ओर लाठीकाठा ब्लाक में मंगला किसान ने दौरा कर विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए | इनके इस दौर को लेकर लाठीकाठा ब्लाक के बीजद कार्यकर्त्ताओं ने एक अच्छी पहल और स्वागत योग्य कदम बताया। वहीं उनका ये भी कहना है कि ये हमारे लिए दुख की बात है कि इस दौरे और कार्यक्रम के दौरान लाठीकाठा ब्लाक के बीजद सरपंच, समिति सदस्य तथा दल के विभिन्न पदाधिकारियों को मंगला किसान द्वारा कार्यक्रम के बारे में ना ही जानकारी दी गई ना ही उन्हें कार्यक्रम में शामिल होने की सूचना दी गई ।
जबकि सरपंच, समिति सदस्य तथा दल के पदाधिकारियों ने बीजद के विभिन्न कार्यक्रम और पार्टी को एकजुट होकर मजबूत बनाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर इनका ये भी कहना है कि राजगांगपुर निर्वाचन क्षेत्र तथा पूरे सुंदरगढ़ जिले में पार्टी के कार्यकर्ताओं को जानकारी है कि राजगांगपुर के पूर्व बीजद टाउन अध्यक्ष अमरेश पंडा को पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर बीजद के सुप्रिमों ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया है। उसके बाबजूद भी अमरेश पंडा मंगला किसान के साथ लाठीकाठा ब्लाक के विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल रहे। इससे इस बात की पुष्टि होती है कि पूर्व विधायक दल के सुप्रिमों के आदेश और निर्देश को अनदेखी कर दल की नीति, आर्दश एवं श्रृंखला को नहीं मान रहे हैं।
वहीं लाटीकटा ब्लाक के बीजद सदस्यों का मानना है कि ये सिर्फ लाठीकाठा ब्लाक व राजगांगपुर निर्वाचन क्षेत्र की बात नहीं है बल्कि पूरे सुंदरगढ़ जिले में दल के नेता व कार्यकताओं में काफी रोष व्याप्त है। खबर ये भी है कि मंगला किसान की कार्यशैली को लेकर बीजद के सुप्रिमों, जिला प्रवेक्षक ,जिला अध्यक्ष को एक लिखित शिकायत दी गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पाटी के कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि आगामी दिनों में अमरेश पंडा दल के किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने पर उसका पूरजोर विरोध किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर खबर ये भी है कि जब भी वर्तमान टाउन अध्यक्ष राजेंद्र बेहरा किसी भी कार्यक्रम का आयोजन करते है उस दौरान मंगला किसान सहित उनके समर्थकों को सूचना देने के बाद भी वे सभी शामिल नहीं होने से कई तरह के सवाल उठना स्वाभाविक है।
वर्तमान में आपसी आरोप प्रत्यारोप से बीजद की एकजुटता पर दरार पड़ने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।वर्तमान समय की स्थिति को देखते हुए यही अंदाज लगाया जा सकता है कि पार्टी कार्यकर्ताओं की आपसी सहमति सही नहीं रहने से इसका सबसे ज्यादा प्रभाव चुनाव के परिणाम और वोटरों की विचारधारा पर पड़ेगा। अब तो समय ही बताएगा कि आगे क्या होगा ?





