श्रमिको को डाले में ठूंस ठूंस कर काम पर लेजाना कहाँ तक उचित है

श्रमिको को डाले में ठूंस ठूंस कर काम पर लेजाना कहाँ तक उचित है

अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ) 

असुरक्षित तरीके से मजदूरों को भेड़ बकरियाँ की तरह डाले में ठूंस ठूंस कर काम पर लेकर जाना और उसपर यातायात विभाग का सबकुछ देखकर भी मौन रहना,कई तरह के प्रश्नो को जन्म दे रहा है। 

घटना है ओडिशा के शिल्पनगरी और कोयलांचल के नाम से प्रसिद्ध तालचेर शहर की। 
तालचेर में उद्योग, कोयला खान, अधिक मात्रा में होने के साथ यहाँ, रेलवे/मकान/सड़क/पुल/नाले आदि निर्माण / मरम्मत का कार्य सालो भर चलता रहता है। इन कार्यो में अधिक संख्या में मजदूरों की आवश्यकता पड़ती हैं। 
तालचेर की सड़को पर मजदूरों को सरकारी नियमों का उलंघन करते हुए खुले डाला वाले, ट्रेक्टर, पिकअप वैन,मालवाही आटोरिक्सा,पिकअप वैन-407 ,आदि में लेजाते रोजाना देखा जा सकता है।

यातायात नियमों का उलंघन करने वालो को चिन्हित करने के लिए शहर के सड़को में कई जगह सीसीटीवी कैमरा लगाया गया है।एक ओर हेलमेट ना पहनने वालो पर कार्यवाही करते हुए उन्हें आर्थिक रूप से दण्डित करने वाला यातायात विभाग श्रमिकों को भेड़ बकरियाँ की तरह डाले में ठूंस ठूंस कर लेजाने जैसी अमानवीय कार्य पर मौन क्यों है,ऐसे में किसी भी श्रमिक के साथ कोई घटना घटती है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा।