शासन के आदेश को ठेंगा दिखाते सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हर्रैया के पूर्व अधीक्षक
उत्तर प्रदेश सरकार जहां एक ओर जीरो टॉलरेंस की नीति पर बेहतर व्यवस्था सुलभ और सस्ती चिकित्सा के लिए कटिबद्ध है जहां स्वास्थ्य मंत्री रोज कही न कही पहुंच कर छापेमारी कर मातहतों की चूडी कस रहे हैं और लोगों का हाल जान रहे है वही कुछ डाक्टर शासन के फरमान की धज्जियां उडाकर न केवल अपना निजी क्लिनिक चला रहें बल्कि जाचं के नाम पर पैथोलॉजी वालों से मिलकर गरीबों के रक्त से अपनी तिजोरी भर रहे हैं,ऐसी चर्चा भी है कि दवाखानों में भी इनका कमीशन बंधा होता है। इन्हें न भगवान का डर है न ही योगी जी के फरमान का, ऐसे ही एक डॉक्टर हैं राकेश कुमार यादव जो पूर्व में हर्रैया तहसील स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक के पद पर काफी दिनों तक काबिज रहे बकौल डाक्टर जब तक उनकी (सपा) सरकार रही है। इस (भाजपा) सरकार में उनका तबादला अम्बेडकर नगर जनपद में हुई तो वहां जाकर पद भार ग्रहण तो कर लिए परंतु यहां का मोहभंग नही हुआ क्योंकि इतने बर्षों में जो सिंडीकेट बना था कहीं टूट न जाए। इसलिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हर्रैया से महज सौ गज के दूरी पर ही अपना निजी क्लिनिक खोलकर बैठ गये। चूंकि यहां काफी दिनों तक सेवा में रहकर दलालों की फौज खड़ी कर ली है जो रास्ते में खड़े होकर मरीज़ों को डाक्टर साहब यहीं बैठे हैं कहकर रोक लेते है और सरकारी हास्पिटल तक जाने ही नहीं देते ।कुछ मरीजों को यह जनकारी ही नहीं हो पाती ये सरकारी नहीं निजी क्लिनिक पर बैठे हैं। कईयों ने इसकी शिकायत शासन और प्रशासन से की किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि भ्रष्टाचार से रंगे हाथो को रंगीन नोटों की लत लग गई है, शायद इसीलिए डाक्टर यादव पर कार्यवाही होने के बजाय क्लीन चिट दे दिया जा रहा है। वहीं शिकायतकर्ता का मान मनौवल कर शिकायत का निस्तारण करा लेने का खडयंत्र भी रचा जा रहा है ।हद तो तब हो गई जब एक शिकायतकर्ता धमकी दी गई की शिकायत उठा लो नहीं तो जब सत्ताइस में मेरी (सपा) सरकार आयेगी तो रास्ता ढूंढे नहीं मिलेगा। जबकि सरकार से इनका बांड है कि सेवारत रहते आप निजी क्लिनिक नहीं चला सकते उसके बदले सरकार वेतन के साथ भत्ता भी देती है ।परंतु राकेश कुमार यादव जैसे डाक्टर शासन के फरमान को नहीं मानते।यही नही जब इनसे इस विषय पर चर्चा करो तो झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। सूत्रों की माने तो कई संगठनों के पदाधिकारियों ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचाई है, अब देखना यह है, कि राकेश कुमार यादव अपना निजी क्लिनिक बंद कर अपने पोस्टिंग स्थल अम्बेडकर नगर जाते हैं या भ्रष्टाचार के बेल पर चढकर हर्रैया के गरीबों का खून चूसते रहेंगे।





