शाजिसकर्ता जेठ-जेठानी के सामने बिलखती रही नवविवाहित बहू

घर भाभी के नाम न करने पर देवर को जाना पडा़ जेल, सुहाग की सेज पर बिलखती रही नवविवाहित बहु, जेठ बहाता रहा घड़ियाली आँसू जेठानी मनाती रही जश्न !

शाजिसकर्ता  जेठ-जेठानी के सामने बिलखती रही नवविवाहित बहू

धन संपत्ति के लिए दगाबाजी , और साजिश रचने की परंपरा प्राचीन काल से चलती आई है।
एक ऐसा ही साजिश प्रकाश में आया है। 
बंडा़मुडा़ थाना क्षेत्र के तिलकानगर निवासी हरहर शम्भू कुमार चौधरी के घर को उनके ही भैया भाभी द्वारा हडपने की साजिश का एक और नया कडी़ सामने आया है।
दरअसल पुरे परिवार की संपत्ति हथियाने की थी साजिश। 
 

*"कैसी रची गई साजिश"* - प्रेमलाल चौधरी और राजकुमारी चौधरी की दो संताने है, 17-18 साल की एक बेटी जो अपाहिज है और 7 साल का एक बेटा ।
सन् 2020 के अन्तिम तिमाही में प्रेमलाल की तबियत इतनी खराब हो गई की राउरकेला के आइजीएच में चिकित्सको ने उसे बेहतर इलाज के लिए किसी बड़े अस्पताल में ले जाने को कहा, चिकित्सक के परामर्श पर भाइयों ने उसे लखनऊ एम्स ले गए वहाँ से कुछ स्वस्थ होने पर बेटे की भविष्य सवांरने के लिए उसे माँ के पास जो अपने वास्तविक स्थान उत्तर प्रदेश में रहती है ले जाने की बात कह कर प्रेमलाल अपने सबसे छोटे भाई को लेकर अपनी पत्नी के पास आता है और पत्नी राजकुमारी की सहमती से लेकर जाता है। राजकुमारी भी पति,देवर,बेटे को अच्छी तरह से विदा करती है और ट्रेन छुटने के पाँच दिन बाद रोते बिलखते पहुँचती है थाने और अपने बेटे की अपहरण हो जाने की शिकायत करती है, इसमें अपने पति और दो देवरो का नाम दर्ज करवाती है जिसमे हरहर शम्भू का भी नाम सामिल होता है। पर हकिकत तो यह थी कि वह अपने सोरडा़ स्थित कार्यालय पर कार्य में व्यस्त था कि पुलिस का काल आता है और उसे पुछताछ के लिए बुलाया जाता है। इस पर हरहर शम्भू थाने पहुँच कर पुलिस को बताता है कि भैया की शादी के बाद से ही वह उनसे अलग रहता है क्योकि भैया भाभी ने ही उन्हे अपने से अलग कर दिया है, मेरी भाभी मेरा घर हडपना चाहती है इसलिए हमपर झूठा आरोप लगा रही है। 
अब अपना काम बिगड़ता देख पतिपत्नी ने अपना पैतरा बदला और प्रेमलाल बेटे को लिए बगैर अकेला तिलकानगर आ गया और फिर शुरु हुआ इन दोनों का हाईवोल्टेज ड्रामा। 
राजकुमारी रोते बिलखते कभी थाने तो कभी पुलिस अधीक्षक कार्यालय तो कभी स्वयंसेवीयो के पास तो कभी राजनेताओ के पास बेटे के अगवा हो जाने की शिकायत लेकर जाती और घड़ियाली आंसू बहाकर उनसे मदद मांगती ।यहाँ गौर करने वाली बात यह है कि एक पुरे प्रकरण में पुलिस बच्चे को लाने के लिए हरहर शम्भू पर ही क्यो दबाब बनाती रही।
यहाँ पुलिस की कारवाई भी संदेह के घेरे में है। जबकि प्रेमलाल और राजकुमारी तो शादी के कुछ महिने बाद ही हरहर शम्मू को अपने से अलग कर दिया था।इतना ही नही सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार दोनो पति पत्नी परिवार और रिश्तेदारो से भी दूरी बना ली थी। इतनी दूरी की ये दोनो किसी रिश्ते दार के यहाँ मृत्यु हो जाने पर भी नही जाते थे विवाह उत्सव तो बहुत दूर की बात है। 
इतना ही नही हरहर शम्भू से मिली जानकारी के अनुसार उनके  पिता की मृत्यु होने पर भी राजकुमारी चौधरी या उनके मायका पक्ष से पिता के आवास पर कोई नही आया,प्रेमलाल को लोकलाज के डर से हरहर शम्भू जबरन ले गया, इस पर भी प्रेमलाल के नखरे की उनके आनेजाने और अन्य खर्चे भी उठाना पड़ा। छोटे बहन की शादी में भी यही हुआ। 

जब दोनो दंपति हरहर शम्भू को अपने बेटे के अपहरण के मामले में फंसा न पाए तो एक और चाल चली हरहर शम्भू के शादी से कुछ दिन पहले साजिश के तहत राजकुमारी अपने देवर हरहर शम्भू से किसी बात को लेकर झगड़ा करती है और उसे मारने के लिए उसके पीछे दौडती है जिसपर प्रेमलाल अपने भाई से कहता है कि तुम जाव मै इसे समझा दुंगा और फिर हरहर शम्भू के पीठ पीछे दोनो पति पत्नी बंडामुंडा़ थाने में जाकर उसके खिलाफ भाभी से मारपीट का मुकदमा दर्ज कराते है। 
और फिर छोटे भाई द्वारा प्रेमलाल  से एफ आई आर को लेकर सवाल किया जाता है तो वह छोटे भाई को अश्ववासन देते हुए कहता है कि तुम चिंता ना करो गुस्से में आकर एफआईआर कर दी वापस कर लेगी मै समझा दूगा। पर ऐसा होता नही और सुलह करने की बात कही जाती है इस शर्त पर की हरहर शम्भू अपनी खून पशिने की कमाई से बनाया हुआ घर अपनी भाभी राजकुमारी के नाम कर दे। 
छोटा भाई ऐसा करने को तैयार नही होता है और समझौता ना होने के कारण पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाता है।
हरहर शम्भू की गिरफ्तारी पर बडा़ भाई प्रेमलाल दुनिया को दिखाने के लिए भाग दौड़ तो बहुत करता है पर जमानत नही करवाता, और हरहर शम्भू की जमानत करवाती है उसकी नव विवाहिता पत्नी। 
यह मंजर सोचकर भी दिल दहल उठेगा कि समाज में जिस बहु के गृह प्रवेश पर लोग घर बाहर, गली मोहल्ले,दुल्हन की तरह सजा देते है जिस बहू के आने पर दावते होती है उस बहु की मेहँदी अभी उतरी भी नही थी कि सगी जेठ-जेठानी हनीमून पर भेजने की जगह थाने, कोर्ट और जेल के चक्कर कटवा दिए। 
जरा उस नजारे को याद किजिए सूहाग की सेजपर बैठी वह बहू जिसका सौहर विवाह के तुरंत बाद जेल भेज दिया गया हो उसपर क्या बीती होगी कैसी गुजारी होगी उसने राते।
जब वो सुहाग की सेज पर आँखो में आँसू लिए बैठी थी और उसकी जेठानी उसे ताने मारते हुए जश्न मना रही थी। 
नमन है उस बहू को इतना सहकर भी पती का साथ ना छोडा़ और उसकी जमानत कराई और आज पति के कंधे से कंधा मिलाकर अपना स्वरोजगार कर रही है।  ऐसी वीरांगना को हमारा नमन है।