मोकीम ने ओडिशा जनता कांग्रेस बनाई
सतीश शर्मा (उपसंपादक)
राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तहत एक नई क्षेत्रीय पार्टी ‘ओडिशा जनता कांग्रेस’ के गठन की घोषणा की गई है। कांग्रेस के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकीम ने बुधवार को भुवनेश्वर के प्रदर्शनी मैदान में आयोजित एक बड़े जनसभा में अपनी इस नई राजनीतिक पार्टी ओडिशा जनता कांग्रेस की आधिकारिक घोषणा की है।
इस नई राजनीतिक पहल को ओडिशा की राजनीति में एक वैकल्पिक मंच और नई आवाज के रूप में देखा जा रहा है।
पार्टी के गठन के बाद मोकीम ने घोषणा की कि ओडिशा जनता कांग्रेस अगले साल होने वाले पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में हिस्सा लेगी। रैली स्थल से उन्होंने युवाओं से आगे आकर जुड़ने का आह्वान भी किया।
पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष के रूप में मोकीम ने कहा कि उनका दल युवाओं की भागीदारी और नेतृत्व पर विशेष ध्यान देगा।
सभा को संबोधित करते हुए मोकीम ने बीजू जनता दल, कांग्रेस और भाजपा तीनों पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि नई पार्टी ओड़िया अस्मिता की रक्षा करेगी। युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं के बीच मजबूत पकड़ बनाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य के भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी समावेशी विकास और नए अवसरों पर काम करेगी तथा राज्य को एक नई दिशा देने का प्रयास करेगी। मोकीम ने यह भी खुलासा किया कि कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के साथ बातचीत जारी है, जो पार्टी से जुड़कर इसके आधार को मजबूत कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि 2024 में सत्ता परिवर्तन के बावजूद ओडिशा की राजनीति में कोई वास्तविक बदलाव नहीं आया। उनके अनुसार, पार्टी का ध्यान तात्कालिक चुनावी लाभ के बजाय दीर्घकालिक विकास पर रहेगा, क्योंकि फिलहाल राज्य में कोई बड़ा चुनाव निकट नहीं है।
इस मौके पर मोकीम की बेटी और निलंबित कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस भी कार्यक्रम में मौजूद रहीं। वह कटक-बाराबती क्षेत्र की विधायक हैं और इस वर्ष जनवरी में मोकीम द्वारा आयोजित युवा सम्मेलन में भी शामिल हुई थीं।
सोफिया ने अपने पिता के प्रति स्पष्ट समर्थन जताते हुए युवाओं से विकसित ओडिशा के निर्माण के लिए इस आंदोलन से जुड़ने का आह्वान किया। लेकिन उन्होंने पार्टी में शामिल होने पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। सिर्फ इतना कहा, “समय बताएगा।”
राज्य में पहले से बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच यह नई पार्टी आई है। हालांकि भाजपा, बीजद और कांग्रेस तीनों दलों ने नये दल को ज्यादा महत्व नहीं दिया है।





