बढ़ने लगी फ्लाईओवर निर्माण कार्य के साथ दुकानदारो की धड़कन
इतिहास गवाह है देश में जब जब विकास की धारा बही है उस धारा में निरीह जनता ही बही है।
एक और बिकास कार्य का शुभारंभ हो चुका है, और इस बार इस विकास की धारा में सैकडो़ की रोजी रोटी बह जानी है।
यह बिकास कार्य बिसरा ब्लाक के कुकडा़ फाटक में फ्लाईओवर के रूप में हो रहा है। यह फ्लाईओवर बनने के बाद राउरकेला -बिसरा के रास्ते जानेवाले सड़क मार्ग का विस्तार किया जाएगा।इस सड़क मार्ग का बिस्तार करने के लिए सड़क के दोनो ओर बनी उन सैकडो़ दुकानों को हमेशा के लिए तोड़ा जाएगा जो दुकाने सैकडो़ परिवार के भरण-पोषण का एक मात्र जरिया है।ये दुकाने जिस भूमी पर बनी है दुकानदारों के पास इस भूमि का कानूनन रूप से मालिकाना हक़ न होने के कारण इन दुकानो का मुआवजा देने के लिए सरकार बाध्य नही है।

हालांकि इन दुकानो को ना तोड़ा जाए या फिर कोई वैकल्पिक रास्ता निकाला जाए इसके लिए दुकानदारो के पक्ष में कुछ एक संगठनो के तरफ से आवाज उठाई गई थी।
पर अब फ्लाईओवर का काम आरंभ हो चुका है और ज्यो ज्यो काम होता जा रहा है त्यों त्यों दुकानदारो की भी दिलो की धड़कन तेज होती जा रही है।
एक ओर इस सड़क मार्ग पर तेजी से वाहनो की संख्या में इजाफा हो रही है,तो दूसरी ओर हावड़ा - मुंबई, राउरकेला - हटिया, राउरकेला - बरसूंआँ, आदि रेल मार्ग पर ट्रेनो की संख्या भी बढ़ रही है।ये सभी रेलमार्ग कुकडा़ गेट से होकर गुजरती है,जिसकी वजह से रेलवे फाटक घंटो तक बंद करना पड़ता है।फाटक बंद होने से फाटक के दोनो तरफ सड़क मार्ग में वाहनो की लंबी कतार लग जाती है, फलस्वरूप लोग अपने गंतव्य तक देर से पहुंचते है। जिससे नौकरी करने वाले, विद्यार्थी, सवारी बस, सवारी आटो रिक्शा, अस्पताल गाड़ी आदि को कई बार नुकसान उठाना पड़ता है।

सड़क का विस्तार और फ्लाई ओवर समय की मांग है। तो कई दशकों से सैकडो़ परिवार के लिए रोजगार का एकमात्र साधन रही दुकाने ना हटने देना दुकानदारों की मजबूरी।





