पानी की समस्या से जूझता तालचेर
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
तालचेर में कब मिटेगी जल संकट
तालचेर क्षेत्र में पचास वर्ष पूर्व प्राकृतिक जलस्रोत, ब्राह्मणी नदी का अमृत तुल्य जल, वन क्षेत्र का सौन्दर्यीकरण मौसम की गर्मी से राहत दिलाती थी। उस समय जल संकट नहीं था।
जीवनदायी पेड प्रचुर मात्रा में थी,फिर धीरे धेरे तालचेर में उद्योग पाँव पसारता गया और शहर का औद्योगिकीकरण होने लगा।
वर्तमान में तालचेर क्षेत्र में बढ़ते खनन और विभिन्न उद्योगों के कारण कई जंगलों को काटकर साफ कर दिया गया है। यहां तक कि पहाडो़ को तोड़कर नष्ट किया जाने लगा। फलस्वरूप पहाड़ों से बहने वाले नाले और झरने भी औद्योगीकरण की भेंट चढ़ गए।
तालचेर क्षेत्र में एनटीपीसी, टीटीपीएस, एफसीआई, कोलावसेरी, नाल्को, डेरेंग, जिंदल और छोटे-बड़े कई उद्योगों के साथ कोयले की कई खदानें हैं। तालचेर के लोग स्वच्छ जल के लिए लंबे समय तक ब्राह्मणी नदी पर निर्भर थे। लेकिन औद्योगीकरण ने दिन ब दिन, नदी के किनारे पम्प हाउस बनाकर बड़े-बड़े पाइपों से पानी खीचना शुरू किया और सरकार के नियमों की अवहेलना करते हुए बोरवेल के जरिए जमीन के नीचे से पानी खीचना आरम्भ कर दिया।
पर्यावरणविदों का कहना है कि गहरे कोयला खनन के साथ-साथ कई बोरवेल और वनों की कटाई जल संकट का मुख्य कारण हैं। इतना ही नहीं, इस ब्राह्मणी नदी के ऊपरी हिस्से में रेंगाली और सामल बैराज बांध बांध दिए जाने के कारण साल के 8 महीने नदी का पानी सूख जाता है। इसी तरह तेज गर्मी और उपरोक्त समस्याओं के कारण तालचेर क्षेत्र के कुआं तालाब और नलकूप भी नवंबर से जून तक 8 महीने सूखे रहते हैं और गर्मी में पानी की समस्या लगातार बनी रहती है। क्षेत्र के लोग इस वजह से कई समस्या का सामना कर रहे हैं। पानी के लिए पुरुषों और महिलाओं द्वारा विरोध प्रदर्शन करने की कई घटनाएं घट चुकी हैं।
गर्मीयो में कोयला खनन की अग्रणी कंपनी एमसीएल टैंकरों की मदद से शहर और ग्रामीण इलाकों में पानी की आपूर्ति करती है।
पानी की इस कमी को देखते हुए सरकार ने सभी परिवारों को स्थायी पानी उपलब्ध कराने के लिए एक पंप हाउस और पाइप प्रणाली लगाने की योजना बनाई, लेकिन यह संभव न हो सका है। हालांकि संबंधित विभाग ने ओवरहेड पानी टंकी का निर्माण तो करा दिया है, लेकिन सभी गांवों व बस्तियों में पाइप डालने का काम समय पर पूरा नहीं होने के कारण लोगों तक पानी पहुंचाना संभव नहीं हो पाया है। इस समस्या का स्थायी सामाधान के लिए प्रशासन व राजनेता गंभीर न होने के कारण तालचेर की जनता आज जलापूर्ति के लिए संघर्ष कर रही है। बहरहाल, तालचेर नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले 21 वार्डों और 21 प्रखंडों में स्थाई जलापूर्ति व्यवस्था कब होगी, यह आम तौर पर एक सवाल खड़ा करता है।





