नगरपालिका की बेरुखी जनता के लिए परेशानी का सबब
अनुराग आचार्य (व्योरोचीफ)
तालचेर उपचुनाव हुए साल भर हो गए पर विकास का दूर दूर तक कहीं नजर नही आ रहा है।
तालचेर नगर परिषद चुनाव हुए 26/03/2023 को एक वर्ष पूरा होने को है, नगर निगम के अधिकारियों व पार्षदो के नेतृत्व ने तालचेर शहर के विकास में गतिरोध पैदा कर दिया है। तालचेर नगर परिषद के 18 निर्वाचित पार्षद कुछ दिनों पहले अपने स्टांप पेपर और पैड नगर निगम के अधिकारियों को लौटाने को लेकर सुर्खियों में थे। इनपर यह आरोप है कि इस एक साल में नगर निगम के कार्यपालक पदाधिकारी व पार्षदो की मनमानी से शहर का विकास अवरूद्ध हो गया है। पूर्व नगर पालिका अधिकारी रश्मीरेखा अमंत के यहां से चले जाने के बाद अब तक इस नगर परिषद में स्थाई नगर पालिका अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो पायी है, जबकि अनुगोल नगर पालिका अधिकारी यहां अस्थाई रूप से कार्यरत हैं। जिससे शहर के लोगों को पता ही नहीं चलता कि वह कितनी बार यहां आते हैं और किस तरह का काम करते है। वार्ड नंबर 1 से लेकर 21 तक जहां देखो वहीं सड़क के किनारे कचरे के ढेर, नालियों की नियमित सफाई नहीं होने से नाकों में बदबू भर जाती है।
फास्टगेट के पास स्थायी मछली, मांस और पोल्ट्री मार्केट के पास नाला भरा होने के कारण क्षेत्र में सड़न की गंध लोगो के सेहत पर भारी पड़ रही है।
बताया जाता है कि निर्वाचित होने के बाद पार्षद कार्यालय में लिखित जानकारी देते हैं कि किस वार्ड में क्या काम होगा। लेकिन इनमें से कुछ कहीं नहीं हुए तो कुछ पार्षद सुर्खियों में आ गए हैं।
तालचेर क्षेत्र को गर्म क्षेत्र माना जाता है। इसलिए मौसम में बढ़ती गर्मी को देखते हुए राहगीरो के लिए चौराहों पर अस्थाई जलछत्रों की व्यवस्था की जाती है, साथ ही शहर के अंदरूनी क्षेत्रों में ट्रकों की मदद से जलापूर्ति की जाती है। आरोप है कि यह जलापूर्ति और जलापूर्ति योजना अभी तक लागू नहीं की गई है, चुकी इस साल तापमान अप्रत्याशित रूप से बढ़ रहा है।
मुद्दा यह है कि महापौर सहित 18 पार्षद सत्ता पक्ष के सदस्य हैं, लेकिन वे उपरोक्त समस्या को कैसे हल नहीं कर सके, इस प्रश्न ने शहर में प्रतिद्वंद्विता को हवा दे दी है।





