गलवान के बलवानों को सादर नमन

गलवान के बलवानों को सादर नमन

नितिन सिन्हा (संपादक - खबरसार) 

गलवान घाटी में शहीद बीरो की शहादत की दूसरी बरसी पर पूरा देश अपने शहीद बलवानों को याद कर रहा है।।

आज से करीब दो साल पहले आज ही के दिन लाईन आफ कंट्रोल पर कुछ ऐसा हुआ था,जिसकी संभावनाएं तो थी परन्तु अपेक्षा नही थी...

घटना के दिन हुआ यूं था कि वादा करके चीनी सैनिक पीछे नहीं हटे थे। और उन्होने बातचीत करने आये निहत्थे भारतीय जवानों पर अचानक हमला किया था।

वरीय सैन्याधिकारियों के बीच बातचीत में हुई सहमति के मुताबिक पिछले साल 6 जून को तय हुआ था कि चीनी सैनिक लद्दाख की गलवान घाटी से अपने इलाके में वापस लौटेंगे। 15 जून तक लाईन आफ कंट्रोल  के सैनिक पीछे नहीं हटे तो 16 बिहार बटालियन के कर्नल संतोष बाबू के नेतृत्व में एक निहत्थे गश्ती दल ने चीनी पक्ष के साथ शाम में वार्ता आयोजित की।
चीनी सैनिकों ने जब पीछे हटने से इंकार कर दिया। यही तीखी झड़प हुई और हाथापाई होने लगी। इस दौरान कई भारतीय सैनिक नदी में गिर गए। चीनी सैनिकों ने अचानक भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया था। जिसमें कर्नल संतोष बाबू गंभीर रूप से घायल हो गए। भारतीय सैनिक बाकी जवानों को मोर्चे पर छोड़कर कर्नल बाबू और एक घायल हवलदार को वहां से ले गए थे।

जो सैनिक मोर्चे पर बचे थे उन्होंने जवाबी कार्रवाई की और चीन के कई सैनिकों को मारने के अलावा बुरी तरह से जख्मी कर दिया था । एक मेजर के नेतृत्व में भारतीय सैनिकों की एक यूनिट फिर झड़प वाले स्थान पर गई और चीन के पोस्ट पर हमला कर कई चीनी सैनिकों को मौत के घाट उतारा था।

हालांकि अपेक्षा के अभाव में या यूं कहें थोड़ी सी रणनीतिक चूक ने हमारे 20 वीरों को हमसे अलग तो जरूर कर दिया था। लेकिन अपनी ऐतिहासिक वीरोचित परंपरा को कायम रखते हुए भारतीय सेना ने प्रारंभिक क्षति के बाद भी घातक पलट वार किया। इस बार लड़ाई स्वचलित या आग्नेय अस्त्रों से नही बल्कि उन्ही औजारों और हाथों से हुई थी,जो चीनी सैनिकों को पीटकर उनसे छीने गए थे। मतलब भारत की तरफ से भी कटीले तारों और किलों से भरे डण्डे व लोहे की रॉड सहित पत्थर से हमला किया गया था।।

भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों से दूसरे दौर के संघर्ष में ही अपना हिसाब बराबर कर लिया था,ऐसे में उन्हें तीसरे दौर का चीनी हमला बोनस के रूप में मिला था। जहाँ से न केवल चीनी सैनिक पीछे धकेले गए थे, बल्कि हमारे सैनिकों के हाथों 50 के आसपास की संख्या में मारे भी गए थे। बताया तो यह भी जाता है कि हमले का जवाब देते हुए भारतीय सैनिक चीनी सीमा क्षेत्र में  घुस गए थे और घन्टो वहां डटे रहे थे।। भारतीय सैनिकों की इसी इमेज को लेकर चीन अन्तराष्ट्रीय मंचों में गलवान विवाद के लिए भारत को दोषी बताता रहा है।

जबकि सम्भावित भारतीय हमले से  डरे-सहमे चीनी सैनिक अपने कैम्प छोड़ कर कुछ किमी पीछे सुरक्षित और खुली जगह पर आ गए थे।।शहीद हुए जवानों की टीम का नेतृत्व करने वाले कर्नल संतोष बाबू को बीते गणतंत्र दिवस पर देश के दूसरे सर्वोच्च युद्ध वीरता पुरस्कार 'महावीर चक्र' से नवाजा गया था । चीन के सैनिकों से मुकाबला करने वाले चार और बहादुरों को मरणोपरांत 'वीर चक्र' दिया गया। जिनमें बिहार रेजिमेंट के नायब सूबेदार नंदू राम सोरेन, नायब सूबेदार दीपक सिंह, 81 फील्ड रेजिमेंट के हवलदार के.पलानी और पंजाब रेजिमेंट के सिपाही गुरतेज सिंह ले नाम शामिल हैं । इसके अलावा बहादुरी से लड़कर घायल होने वाले हवलदार तेजेंदर सिंह को भी वीर चक्र दिया गया है। 

भारत और चीन के बीच गलवान घाटी का यह हिंसक संघर्ष तीन दौर में हुआ था। 15 जून की शाम 7 बजे से शुरू हुए खूनी संघर्ष का पहला दौर रात 09 बजे तक चला। यहां हाथों कटीले तारों से बने घातक हथियारों के अलावा लोहे के रॉड लेकर आये 200 चीनी सैनिकों ने निहत्थे भारतीय सैनिकों पर मनोवैज्ञानिक और संख्यात्मक बढ़त दोनों हासिल कर ली थी। परन्तु दूसरा दौर जो रात 9.15 बजे से 11 बजे तक चला था, यहां से भारतीय सैनिकों ने पलट वार के साथ बराबरी हासिल कर ली। उन्होंने चीनियों को बुरी तरह से मारते-पीटते हुए उनके क्षेत्र में वापस ढकेल दिया था। अपने जवानों को बुरी तरह पिटता देख पीछे रिजर्व में खड़े शताधिक चीनी सैनिकों ने तीसरा दौर का हमला किया था,जो रात 11 बजे से शुरू हुआ और 16 जून की तड़के पांच बजे तक चलता रहा। इस दौर में भी भारतीय सैनिकों ने अपना दम खम दिखाया। तीसरा चरण खत्म होने के बाद तक यह स्पष्ट हो चुका था कि 40 से अधिक चीनी सैनिक मारे गए है और जिनमे से कई चीनी जवान नदी के तेज बहाव में बह गए थे। वहीं हमारे देश के 20 जवानों की शहादत भी हो चुकी थी। हमले में घायल चीनी सैनिकों की संख्या 100 से ज्यादा थी। भारतीय सेना की उस वीरता को याद करते हुए।

आइये,सुबह(शहादत का समय) की पहली किरण के साथ पूरे श्रद्धा भाव से गलवान के बलवानों को हम नमन करें।।*????