देश के सच्चे सेवक सफाई बीर

देश के सच्चे सेवक सफाई बीर

नितिन सिन्हा (संपादक-खबरसार) 

आज हम समाज के एक ऐसे समर्पित समुदाय की चर्चा करते है,जिन्हें आज कल हम आप "सफाई_कर्मी" के नाम से जानते है. कुछ साल पहले सामान्य बोल-चाल में हम इन्हें स्वीपर या भंगी भी कहते थे।। आज भी ज्यादातर सभ्य लोग इन्हें इसी नाम से बुलाते है।। कुछ लोग सुबह सवेरे इन सेवकों का मुंह देखना अशुभ मानते है तो कुछ लोग इनको छूना इनसे बात करना यहां तक की इनके पास खड़े होने हिचकते हैं।।।

हमारे और इनके लिए बड़ी विडम्बना की बात यह है कि देश की सुरक्षा में तैनात सरकारी सैनिकों के बाद यही ऐसा इकलौता ऐसा वर्ग है,,जिसने अपने देश और समाज की निस्वार्थ सेवा अपनी जान की भी परवाह नहीं की है।।

फिर भी हमारे समाज मे इस समुदाय या इस कार्य से जुड़े लोगो को हीन भावना से देखा जाता है.वैसे तो इनके त्याग और बलिदान की वास्तविकता बताने के लिए इतने प्रमाण प्रयाप्त होने चाहिए कि हम कथित सभ्य लोगो की फैलाई गई असीमित गन्दगी और मलबे की सफाई करने में प्रति वर्ष देश मे औसतन 150 से 200 सफाई कर्मचारियों को अपनी जान गंवानी पड़ती है.यह आंकड़ा सरकारी है,जबकि गैर सरकारी आंकड़े निश्चित तौर पर और भी बड़े तथा गम्भीर होंगे.

बीते 13-14 सालों में सबसे ज्यादा सफाई कर्मियों की मौत अकेले राजधानी दिल्ली शहर में हुई है.इस दौरान करीब 90 सफाई- कामगारों की मौत हमारी सेवा के दौरान हो चुकी है.जबकि 1500 सफाई कर्मी देश भर में अलग-अलग घटनाओ में मारे गए. इतनी बड़ी संख्या में सेवाकाल के दौरान जान गंवाने वाले इस जिम्मेदार सेवा-भावी समुदाय के लिए हम देशवासियों की संवेदनाएं कभी भी जागृत नही हुई.जबकि दूसरे अन्य लोगों( नेता और अभिनेता) की मौतों पर हम छाती पीट-पीट कर रोते रहे हैं.यही नही कई बार केंडल मार्च भी निकाला है। कई श्रद्धाजंलि सभा तक आयोजित किया।। परन्तु जिनकी सेवा के बिना एक दिन में हमारे शहर,गांव,कस्बों में कचरे,गन्दगी के ढेर जमा हो जाते है.जिससे शहर में बिमारी और महामारी का खतरा बन जाता है.उन सच्चे सेवादारों की मौत पर सिवाय देश की न्यायपालिका के अलावा किसी भी देशवासी ने अब तक कभी-कोई संवेदना प्रकट नही की।।

 वही इस विषय मे राष्ट्रपिता के बोले यह बोल याद आतें है,कि "एक ऐसा व्यक्ति जो पूरे समाज की फैलाई असह्य गन्दगी को बिना घृणा या क्षोभ भाव के साफ करता हो वह अछूत और तिरष्कृत कैसे हो सकता है?* मैं इंसानों में इस तरह के अमानवीय भेदभाव का समर्थन नही करता हूँ.साथ ही मेरे आसपास या साथ रहने वाले सभी लोगों से इस बात की अपेक्षा भी रखता हूँ"। इंसानियत के नाते इस वर्ग के लोगों को आज से नहीं बल्कि अभी से अपमानित करना बंद करें।हो सके तो मेरी तरह अपनी फैलाई गंदगी को खुद अपने हाथों से साफ करना शुरू करें- माहात्मा गांधी।। 

पुनः सेवा कार्य के दौरान अपनी जान गंवाने वाले कर्मठ,सेवा-भावी "सफाई-वीरों"को पूरी कृतज्ञता के साथ हमारी ओर से कोटि-कोटि नमन -----