जलजमाव के लिए जिम्मेदार कौन

बरसात का मौसम पूरे यौवन पर है, सुंदरगढ़ जिले में रोजाना कहीं ना कहीं बरसात हो रही है।बरसात होने से कई स्थानों पर जल जमाव की समस्या भी ,उत्पन्न हो रही है। जबकि सरकार की ओर से रिहाइशी इलाकों और सड़को पर से जल निकासी के लिए नालियों और नालों की उत्तम ब्यवस्था की गई है। फिरभी बरसात के मौसम में जल जमाव की समस्या, रोजाना,कहीं ना कहीं देखने को मिल जाती है। पर ऐसा क्यों। इस समस्या के लिए काफी हद तक स्थानीय नागरिक जिम्मेदार है। क्योंकि साल के आठ महिने लोग नालीयों और नालों को कुडादान बना देते है, रोज मर्रा की कुडा, कचरा, नालों और नालियों में ही डालते रहते है, नतिजा यह होता है की, बरसात का मौसम आते आते नालीयां और नाले पूरी तरह कचरे से भर कर जाम हो जाते है, जिससे होकर पानी निकलना काफी मुस्किल भरा काम होता है। और फिर जरा सी बरसात में इन्ही नालियों से बरसात का पानी बाहर आने लगता है। जिन स्थानों से जल निकासी के लिए यह नालियां और नाले बनाए गए होते है, वहां जल जमाव होने लगता है। और ऐसे मौको का फायदा उठाते हुए विपक्षी पार्टियां सत्तापक्ष को घेरने में और अपनी राजनीति चमकाने में लग जाते है। कचरे से भरे इन नालीयो को साफ रखने की जिम्मेदारी स्वयं स्थानीय लोगों को लेनी होगी, तभी जल जमाव की स्थिति से निजात मिल पाएगा, ना की इसके लिए किसी को दोषी ठहराने से। 
सारांश दैनिक सभी नागरिकों से अपील करता है कि किसी भी नाली या नाले में कुडा, कचरा ना डाले, खासकर प्लास्टिक की चिजे, जैसे प्लास्टिक की बोतल, खाने के रैपर आदी,। कुडा कचरा डालने के लिए कुडादान का प्रयोग करे। और अपने घर में भी कुडादान रखे, जिसे सफाईकर्मी के सुपुर्द करें। तभी यह नालीयां कचरा मुक्त हो सकता है। वर्तमान समय में कूडा दान और सफाईकर्मी की व्यवस्था शहरांचल और ग्रामांचलों में भी उपलब्ध है।