चिलिका के संरक्षण व विकास के लिए 2000 करोड़ रुपये की नई योजना

चिलिका के संरक्षण व विकास के लिए 2000 करोड़ रुपये की नई योजना

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

भुवनेश्वर, 4 जनवरी। ओडिशा सरकार ने एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झील चिलिका के संरक्षण, जैव-विविधता संवर्धन और आसपास के क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए एक नई महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इस योजना के तहत 1500 से 2000 करोड़ रुपये की लागत से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।
इस संबंध में शनिवार को भुवनेश्वर में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता कानून, लोक निर्माण एवं आबकारी मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने की। बैठक में चिलिका झील के सामने मौजूद पर्यावरणीय चुनौतियों, विशेषकर गाद जमाव (सिल्टेशन) की समस्या पर विस्तार से चर्चा की गई।
मंत्री हरिचंदन ने बताया कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के सहयोग से एक वैज्ञानिक डीपीआर तैयार की जा रही है, जिससे झील के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के साथ-साथ इसे एक नया स्वरूप दिया जा सके। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आधुनिक अवसंरचना विकास और वैज्ञानिक संरक्षण का समन्वय होगी, जो राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी संरक्षण एवं पर्यटन योजनाओं में से एक साबित हो सकती है।
योजना के तहत चिलिका झील के आसपास के क्षेत्रों का समग्र विकास, जलमार्गों को अवरोध-मुक्त बनाना, नौपरिवहन और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। वर्तमान में झील की गहराई 0.38 मीटर से 6.20 मीटर के बीच है, लेकिन नदियों और नहरों से हर वर्ष लगभग 8 लाख टन गाद झील में जमा हो रही है, जिससे इसकी क्षमता प्रभावित हो रही है।
रामसर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त चिलिका को जलीय पारिस्थितिकी संरक्षण की राष्ट्रीय योजना के अंतर्गत मिलने वाली राशि के समुचित उपयोग पर भी जोर दिया गया है। इस परियोजना से पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ मत्स्यजीवियों की आजीविका सुदृढ़ होगी और जैव-विविधता संरक्षण को मजबूती मिलेगी।