क्या बिसरा हिंदी स्कूल में पढा़ रहे है फर्जी शिक्षक
बिसरा अंचल में ऐसी बात सूनने को मिल रही थी की सरकारी हिन्दी उच्च प्राथमिक विद्यालय में कोई अप्रशिक्षित शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहा है। इतना ही नही वह नकली प्रमाण पत्र पर नौकरी कर रहा है। यह बात कई दिनो तक बिसरा अंचल में चर्चा का बिषय बनी रही। सच्चाई जानने के लिए किसी ने सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए सरकारी हिन्दी उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षको की शैक्षणिक योग्यता संबंधित दास्तावेज माँग लिए। सूचना का अधिकार के माध्यम से शिक्षको की शैक्षणिक योग्यता संबंधित जो दस्तावेज उपलब्ध कराई गई है।उसमें विद्यालय छोड़ने का प्रमाण पत्र नहीं था और किसी का अंक तालिका प्रमाण पत्र (रिज़ल्ट) नहीं था। सो, जानकारी मांगने वाले ने सभी शिक्षको की स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र (लिंविंग सर्टीफिकेट) और अंक तालिका प्रमाण पत्र की मांग करते हुए प्रथम अपील कर दी। जिसपर स्कूल की प्रधानाध्यापिका सूचना मांगने वाले पर इंदू राय का डर दिखाते हुए धमकी देने लगी।
इंदूराय के बारे में प्राप्त सुचना के अनुसार, इंदूराय कभी राउरकेला नगरपालिका अंतर्गत आनेवाले वार्ड नम्बर 13,गोपबंधूपाली की पार्षद हुआ करती थी।
ऐसा भी सूनने को मिलता है की राजनीति में इंदूराय अच्छी पकड़ रखती है। सूचना का अधिकार के तहत इंदूराय द्वारा उपलब्ध कराई गई दस्तावेज के अनुसार इंदुराय केवल दशवी पास है,इसके अलावे और कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराई गई है। और इसी स्कूल में अध्यापिका के पद पर नौकरी कर रही हैं। इनकी दसवी पास होने का प्रमाण पत्र भी संदेह का कारण बना हुआ है, संदेह का कारण यह है कि इंदूराय की दसवीं पास होने का प्रमाण पत्र श्री जगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा जारी किया गया है, जबकि विश्वविद्यालय की पढ़ाई स्नातक से आरम्भ होती है।

प्रमाण पत्र के अनुसार इंदूराय की जन्मतिथि 31 जनवरी 1971 बताई गई है, और दसवी की परीक्षा देने की तिथि अप्रैल 2000 ई. बताई गई है, और इस प्रमाण पत्र को जारी करने की तारीक 6 सितम्बर 2003 बताई गई है। जब इन्होने दसवी की परिक्षा दी थी तब इनकी उम्र 29 साल से अधिक हो चुकी थी। पर प्रमाण पत्र में पूर्व नियमित (Ex Regular) या नीजी (Private) परीक्षा देने का जिक्र नहीं किया गया है। अर्थात प्रमाण पत्र के अनुसार इंदू राय ने नियमित (Regular) पढाई की है।
इसलिए उनकी उम्र भी संदेह के घेरे में है। ऐसा भी सुनने को मिलता है कि इंदूराय ढंग से हिंदी भी नहीं पढ़ पाती है, जबकि प्रमाण पत्र के मुताबिक उन्होने संस्कृत विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूरी की है।गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि उन्होने अपनी राजनीति पकड़ के दम पर शिक्षक की नौकरी हथयाई हुई है। सच क्या है इसकी उच्चस्तरीय जाँच पड़ताल होनी चाहिए।





