कालाहीरा का शहर तालचेर की हालत कब सुधरेगी
अनुराग आचार्य (व्यौरोचीफ)
देश की स्वतंत्रता के बाद से इन 76 वर्षों में समय बदल गया है, लोगों की जीवन शैली बदल गई है, वे सभी सहमत हैं कि तालचेर ने देश के आर्थिक विकास में बहुत योगदान दिया है, लेकिन तालचेर के लोगों की जीवन यात्रा नहीं बदली है। तालचेर की धरती के वीरों का बलिदान और उनके सपने व्यर्थ होते दिख रहे हैं।
तालचेर का हर निवासी, चाहे वह अमीर हो या मध्यम वर्ग, दिल में दर्द और हाथो में थाली लिए खड़ा होना बहुत दर्दनाक है, बुनियादी सुविधाएं दिन-ब-दिन कम होती जा रही हैं। इन 76 वर्षों में से केवल पिछले 40 वर्ष ही उलटे जा सकते हैं, जिनमें से 30 वर्षों को माननीय वर्तमान सांसद महेश साहू और माननीय विधायक ब्रजकिशोर प्रधान का नेतृत्व कहा जा सकता है। बहुत से लोग मानते हैं कि इस युग ने तालचेर के विकास में एक क्रांति देखी, इसलिए इस अवधि को तालचेर का युवा या नवकलेवर काल कहा जाता है, लेकिन आज तालचेर सभी क्षेत्रों में आपदा में डूब रहा है। और अब हमारी जिम्मेदारी पूरी हो गई है,जनता के दोनों सेवक परिपक्वता की उम्र तक पहुंच गए हैं, फिर भी लोग आज भी वहीं हैं जहां कल थे।
तालचेर में कोई स्वास्थ्य सुविधाएं अच्छी नहीं कही जा सकती है, शिक्षा का कोई बुनियादी अधिकार नहीं है,सार्वजनिक परिवहन तक कई लोगो की पहुंच नहीं है आज, यहां के निवासी धूल और धुएं के साथ जीवन यापन करने के लिए मजबूर हैं। तालचेर वासियों में अधिकांश ने अपना घर खो दिया है, जबकि अन्य अभी भी अपने जीवन से संघर्ष कर रहे हैं। तालचेर की किस्मत कब बदलेगी, पुरखों के सपनों को कौन साकार करेगा और आम आदमी को बुनियादी हक कौन देगा।
बरपाल से कनीहा राष्ट्रीय राजमार्ग तक फ्लाई ओवर ब्रीज और 4 या 6 लाइन की सड़के जहाँ आवश्यकता है।

दूसरे शब्दों में, जब तक राज्य सरकार सार्वजनिक सड़क और व्यावसायिक मार्ग, तालचेर मेडिकल कॉलेज मिमसर को अपने हाथो में नही ले लेती, तब तक प्रगति का कोई संकेत नहीं है। तालचेर मिनी एयरोड्राम फील्ड, स्टेडियम, क्वीन पार्क पचेरी, मिनिनंदाकानन, बीजूपार्क, कोलम्यूजियम, रेंगाली से वाया तालचेर से भुवनेश्वर और संबलपुर तक बस स्टैंड में सुधार सरकारी बस सेवा, ट्रक टर्मिनल, सरकारी डॉक्टर और उपकरण हाटोतोटा नगर परिषद में कर्मचारियों की कमी कई पुराने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कई वर्षों से डॉक्टरों की कमी के साथ जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं।भूमि प्रकाश व्यवस्था, पुल और मेट्रो प्रणाली के साथ, तालचेर और कनिहा में केंद्रीय विद्यालयों की स्थापना, मौजूदा केंद्रीय विद्यालयों में आवश्यक शिक्षकों की भर्ती, सड़कों और छोटे पुलों की रोशनी में तालचेर के उपनगरों और गांवों और छोटे पुलों का पुनर्वास, तालचेर की कुल देवी हिंगुला माता के मंदिर तक सड़क और प्रकाश व्यवस्था के साथ-साथ पश्चिमेश्वर मंदिर से ढेंकानल परजंग में सारंग चेक गेट के पास ईश्वरेश्वर को जोड़ने के लिए ब्राह्मणी नदी पर झूलते पुल का निर्माण, फास्टगेट से राजबत्ती होकर बांकधरा स्ट्रीट तक ऐतिहासिक फाटकों का पुनरुद्धार और पुराने इतिहास को पुनर्जीवित करने के लिए सड़क के दोनों किनारों का सौंदर्यीकरण और ऐतिहासिक स्थानो को पुनर्जीवीत कौन करेगा इन समस्याओं को लेकर स्थानीय लोगों में अटकलें लगाई जा रही हैं।





