कंकाल भी ना बची होती तो क्या होता
एक व्यक्ति अपनी बहन के कब्र को खोद कर उसकी कंकाल को उस बैंक लेकर आता है, जहां उसकी स्वर्गीय बहन का खाता था और उसकी बहन ने अपने जीवन काल में कुछ रूपये जुटा कर अपने खाते में जमा किये थे। यह मामला पूरे देश में चर्चा का बिषय बना हुआ है। सोशलमीडिया और समाचार चैनलों में यह घटना बहुत ज्यादा वायरल होने के बाद बैंक व वरिष्ठ अधिकारी हरकत में आये और अंतत: मृतक के खाते से धन निकासी हो गई। यह घटना ओडिशा के केन्दुझर जिले का है, जहाँ जीतु मुण्डा नामक एक व्यक्ति अपनी मृत बहन के खाते में जमा राशि निकालने के लिए संबंधित बैंक में जाता है। बैंक में उससे कहा जाता है कि, पैसे निकालने के लिए खाता धारक को लेकर आओ या उनकी मृतक प्रमाणपत्र लेकर आओ, जो सही भी है, पर किसी कारण जीतू मुण्डा बैंक वालों को अपनी बहन के मृत होने का प्रमाण नहीं दे पाता और मृत बहन की कब्र खोदकर उसकी कंकाल को कंधे में ढोकर बैंक में ले आता है। इस घटना को कुछ लोगों ने कैमरे में कैद किया और फिर शोसल मीडिया में यह घटना वायरल होती गई।समाचार संस्थाओं ने भी इसे हाथों हाथ लिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बहुत बड़ा प्रश्न खडा़ कर दिया है, वो यह कि यदि जीतू मुण्डा की बहन को दफनाया नहीं गया होता और उसका दाह संस्कार किया गया होता, उसकी शव को जला दिया गया होता। ऐसी परिस्थितियों में जीतू मुण्डा क्या करता, अपनी बहन के मृत होने का सबूत कहाँ से ला पाता? बैंक वाले को कैसे विश्वास दिलाता की उसकी बहन अब इस दुनिया में नहीं रही, और वह अपनी बहन के द्वारा उक्त बैंक में रखी गई धनराशि का हकदार है? इस घटना ने बैंक की कार्यशैली पर बहुत बड़ा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है? अगर बैंको के ऐसे रिकार्ड खंगाला जाए तो पता चलेगा कि कई ऐसे मामलों में मृतकों के परिजन पैसे निकासी में अक्षम हो गए , और बैक कर्मचारियों के सवालों से तंग आकर धन निकासी की आस छोड़ दी, चाहे वह खाते चालू हो, जमा खाते हो या जीवन बीमा वाले हो।





