एनआईटी में अंतर्राष्ट्रीय बाइटस आयोजित
*प्रेस विज्ञप्ति: एनआईटी राउरकेला में अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 'बायोलॉजिकल इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और साइंसेज (BITES-2024)' का शुभारंभ*
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला ने एनआईटी उत्तराखंड के सहयोग से 'बायोलॉजिकल इनोवेशन, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और साइंसेज (BITES-2024)' नामक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन 18 दिसंबर 2024 को किया। यह तीन दिवसीय कार्यक्रम (18-20 दिसंबर, 2024) एनआईटी राउरकेला के जैव प्रौद्योगिकी और चिकित्सा इंजीनियरिंग विभाग एवं मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग द्वारा आयोजित किया गया है। उद्घाटन समारोह बीबी ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। सम्मेलन का मुख्य विषय: "बायोलॉजिकल इनोवेशन का भविष्य" है।
कार्यक्रम का शुभारंभ एनआईटी राउरकेला से संयोजक प्रो. रवि कांत अव्वारी के स्वागत भाषण से हुआ, जिसमें उन्होंने सम्मेलन को विशेषज्ञों के साथ जुड़ने और जैविक नवाचार में प्रगति करने का एक अद्वितीय अवसर बताया। इसके बाद, एनआईटी उत्तराखंड से संयोजक प्रो. धर्मेंद्र त्रिपाठी ने कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 100 शोध सारांश प्राप्त हुए हैं और इसमें 60 प्रतिभागी व्यक्तिगत रूप से तथा 40 ऑनलाइन भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में अमेरिका, मिस्र, मलेशिया, पुर्तगाल, सिंगापुर और भारत के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी, एनआईटी और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लगभग 50 मुख्य वक्ता शामिल हो रहे हैं।
मुख्य अतिथि प्रो. धीरेंद्र एस. कट्टी, निदेशक, आईआईटी गोवा, ने अपने संबोधन में कहा, "हमें ऐसा शोध कार्य करना चाहिए जो समाज के विकास और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान दे। अकादमिक शोध में व्यावहारिक दृष्टिकोण को शामिल करना आवश्यक है।" उन्होंने यह भी कहा, "जैविक विज्ञान मानव स्वास्थ्य से लेकर पर्यावरणीय स्थिरता तक की प्रमुख समस्याओं का समाधान करने में सक्षम है।" उन्होंने शोधकर्ताओं को अपने कार्य को अगले 10-20 वर्षों की सामाजिक आवश्यकताओं के साथ संरेखित करने की सलाह दी।
सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि, प्रो. बिद्युत के. मोहंती, वीसीओएम कॉलेज, अमेरिका, ने शोधकर्ता की यात्रा में जुनून, दृढ़ता और धैर्य के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, "शोधकर्ताओं को अपने क्षेत्र में प्रस्तुत करने योग्य और पूर्वानुमानित बनने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि ये गुण शोधक्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए आवश्यक हैं।"
एनआईटी राउरकेला के निदेशक, प्रो. के. उमामहेश्वर राव, ने कहा, "मानव शरीर जीवन के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है, जो जैव विज्ञान के क्षेत्र में चुनौतियों और अवसरों दोनों को प्रस्तुत करता है। वर्तमान दवाएं या उपकरण बीमारियों को नियंत्रित करते हैं, लेकिन हमें अभी भी ऐसे उपचार विकसित करने हैं जो पूर्ण इलाज प्रदान कर सकें।" उन्होंने इस सम्मेलन को जैव विज्ञान और जैव अभियांत्रिकी के क्षेत्र में नई सीमाओं को परिभाषित करने और बेहतर भविष्य के लिए प्रभावशाली समाधानों को बढ़ावा देने का एक उत्कृष्ट मंच बताया।
एनआईटी राउरकेला के एसआरआईसीसीई डीन, प्रो. स्वदेश कुमार प्रतिहार, ने प्रतिभागियों से सतत प्रौद्योगिकियों को विकसित करने और मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए जैविक विज्ञान का उपयोग करने का आग्रह किया। वहीं, एनआईटी राउरकेला के रजिस्ट्रार, प्रो. रोहन धीमान, ने शोध, नवाचार, और संस्थान के द्वारा शुरू किए गए सफल स्टार्टअप्स के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष, प्रो. देवेंद्र वर्मा, ने बताया कि विभाग के शिक्षक और छात्र अपने शोध कार्यों को पेटेंट और उद्यमशील उपक्रमों में बदलने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान एक “सम्मेलन मैगजीन’ का विमोचन भी किया गया और धन्यवाद ज्ञापन सह-संयोजक प्रो. प्रसून कुमार ने दिया।
सम्मेलन में इन विषयों पर हुई चर्चा:
"ओडिशा के एक गहन कृषि क्षेत्र में क्रोनिक किडनी डिजीज: पर्यावरणीय विषाक्त पदार्थों की भूमिका का खुलासा"
"कैंसर अनुसंधान में बायोमार्कर की खोज"
"डेंटल क्राउन का डिज़ाइन और विकास: पारंपरिक दृष्टिकोण से डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग तक"
"ट्यूमर सूक्ष्म पर्यावरण और स्तन कैंसर मेटास्टेसिस"
"जलीय पर्यावरण में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए क्रियात्मक बायोपॉलिमर्स की भूमिका"
"सिर और गर्दन के संक्रमण से जुड़े पुनरावर्ती बहु-औषधि-प्रतिरोधी सूक्ष्मजीवों की माइक्रोबियल प्रोफाइलिंग"





