एनआईटी में 3 दिवसीय सामग्री विज्ञान पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुंभारंभ

एनआईटी में 3 दिवसीय सामग्री विज्ञान पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुंभारंभ
एनआईटी में 3 दिवसीय सामग्री विज्ञान पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुंभारंभ

राउरकेला: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनआईटी), राउरकेला के धातुकर्म और सामग्री इंजीनियरिंग विभाग ने इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन प्रोसेसिंग एंड कैरेक्टराइजेशन ऑफ मटेरियल्स (आईसीपीसीएम 2024) के छठे संस्करण का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन 5 से 7 दिसंबर 2024 तक आयोजित किया जाएगा और इसका उद्देश्य शैक्षणिक और औद्योगिक क्षेत्रों के बीच सार्थक विचारों का आदान-प्रदान करना है। 

2011 में नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन प्रोसेसिंग एंड कैरेक्टराइजेशन ऑफ मैटेरियल्स (एनसीपीसीएम) के रूप में शुरू हुआ यह सम्मेलन 2018 से अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में बदल गया है। शुरुआत से ही आईसीपीसीएम एक प्रमुख वार्षिक आयोजन के रूप में स्थापित हो गया है, जो दुनिया भर से ख्यातिप्राप्त विद्वानों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत से जुड़े लोगों को आकर्षित करता है।

आईसीपीसीएम 2024 का उद्घाटन मुख्य अतिथि  अतनु भौमिक (राउरकेला स्टील प्लांट के प्रभारी निदेशक) और एनआईटी राउरकेला के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव की उपस्थिति में हुआ। अन्य विशिष्ट अतिथियों में आईसीपीसीएम 2024 की आयोजन समिति के सदस्य प्रो. बंकीम चंद्र राय (मुख्य सलाहकार), प्रो. देबाशीष चइरा (एमएम विभाग के प्रमुख और संरक्षक), प्रो. राजेश कुमार प्रुस्टी (अध्यक्ष), प्रो. अंशुमान पात्र (अध्यक्ष), और प्रो. अजीत बेहरा (सचिव) शामिल थे ।

सम्मेलन की शुरुआत प्रो. राजेश कुमार प्रुस्टी के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने सम्मेलन के विषयों का वर्णन किया। उन्होंने बताया, “इस वर्ष का सम्मेलन कई महत्वपूर्ण विषयों जैसे स्टेनलेस और विशेष इस्पात, अपशिष्ट प्रबंधन, फाइबर-प्रबलित पॉलिमर (एफआरपी) कंपोजिट्स, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के लिए सामग्री, स्मार्ट सामग्री, सामग्रियों का पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग, बायोमैटेरियल्स और सामग्री डिज़ाइन पर चर्चा करेगा।”

मुख्य अतिथि श्री अतनु भौमिक ने धातुकर्म और सामग्री उद्योग में सतत प्रथाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “दुनिया में भारत लौह और इस्पात का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और इसे उत्पादन बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने की दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ता है। आईसीपीसीएम जैसे सम्मेलन कम-उत्सर्जन वाली औद्योगिक समाधानों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो भारत की दीर्घकालिक निम्न-कार्बन विकास रणनीति के अनुरूप हैं।” उन्होंने पुनरावर्तन (रीसाइक्लिंग) और अपशिष्ट प्रबंधन में पर्यावरण-अनुकूल औद्योगिक नीतियों के महत्व को भी रेखांकित किया।

प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने सामग्री उद्योग में पर्यावरणीय चुनौतियों को संबोधित करने की तात्कालिकता पर बल दिया और कहा, “भारत ने 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि, कोयले पर औद्योगिक उत्पादन की निर्भरता को देखते हुए, इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कई चुनौतियां हैं। यहां तक कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उत्पादों के  लिए आवश्यक सामग्री का निर्माण करना भी ‘ऊर्जा’ पर निर्भर करता है, जो फिर से जीवाश्म ईंधनों से प्राप्त होती है। यह हरित इस्पात उत्पादन जैसी सतत प्रथाओं की ओर तत्काल बदलाव की आवश्यकता को दर्शाता है।”

प्रो. अंशुमान पात्र ने इस आयोजन के पैमाने और दायरे पर प्रकाश डाला। इस वर्ष के सम्मेलन में भारत के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया है और इसमें वैश्विक रूप से प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (बर्कले), यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल और नॉर्थ कैरोलिना स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के मुख्य व्याख्यान शामिल हैं। आईआईएससी बेंगलुरु, आईआईटी और एनआईटी जैसे भारतीय संस्थानों के प्रतिनिधि और टाटा स्टील, जिंदल स्टेनलेस जैसे प्रमुख उद्योग पेशेवर भी चर्चा में भाग लेंगे।

प्रो. बंकीम चंद्र राय ने इस आयोजन के प्रायोजकों, विशेष रूप से राउरकेला स्टील प्लांट और टाटा स्टील, को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने उभरते हुए संरचनात्मक सामग्री के रूप में एफआरपी कंपोजिट्स के महत्व पर भी जोर दिया। एमएम विभाग के प्रमुख प्रो. देबाशीष चइरा ने शैक्षणिक और औद्योगिक सहयोग में सम्मेलन की भूमिका को रेखांकित किया, जबकि प्रो. अजीत बेहरा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी प्रतिभागियों और सहयोगियों के योगदान की सराहना की।

आईसीपीसीएम 2024 सामग्री इंजीनियरिंग में अंतःविषय अनुसंधान को बढ़ावा दे रहा है, जो वैश्विक चुनौतियों के लिए नवीन समाधान खोजने पर केंद्रित है। यह क्षेत्र, जो धातुओं, सेमीकंडक्टर्स, मिश्र धातुओं, पॉलिमर आदि जैसी सामग्रियों को डिज़ाइन और सुधारने से संबंधित है, उत्पादन, निर्माण, ऊर्जा, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव जैसे कई उद्योगों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शैक्षणिक और औद्योगिक सहयोग के माध्यम से, यह सम्मेलन सतत और उच्च-प्रदर्शन सामग्री नवाचारों की दिशा में मार्ग प्रशस्त करने का लक्ष्य रखता है।