एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार बेपटरी हुई रेल-सड़क मार्ग हुआ बाधित
रामप्रवेश चौधरी (संवाददाता)
राजगांगपुर : फिर एक बार मालगाड़ी की इंजन बेपटरी होने से घंटों फाटक पर फंसे लोग।सप्ताह भर के भीतर ये दुसरी घटना, रेलवे फाटक के दोनों ओर वाहनों की लगी लंबी कतारें।राज्य सरकार व जिला प्रशासन की उदासीनता से अधर में लटका ओवरब्रिज निर्माण कार्य ।
राजगांगपुर : शहर के रेलवे फाटक पर फिर एक बार मालगाड़ी की इंजन बेपटरी हो गयी जिस कारण फाटक के दोनों ओर लोग घंटों जाम में फंसे रहे । साथ ही साथ फाटक के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। इस मौके पर शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई। जब से मुख्य फाटक के पास तीसरी रेल पटरी का काम चल रहा है तब से एक हफ्ते के भीतर दो बार डिरेल की घटना हुई है । समाचार लिखे जाने तक घटनास्थल पर पहुंची बंडामुंडा रेलवे एआरटी टीम ने कड़ी मशक्कत कर बेपटरी हुई इंजन को दोबारा पटरी पर वापस लाने के लिए जी तोड़ मेहनत करते हुए नजर आए। इस बीच बेपटरी हुई इंजन से लगी मालगाड़ी के डिब्बों को काटकर अलग करने के बाद मुख्य फाटक पर लगे जाम को सामान्य किया गया । यह घटना आज दोपहर 12 बजे के करीब घटी। वहीं फाटक बंद रहने से दोनों तरफ छोटी बड़ी वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोग घंटों फाटक पर फंसे हुए नजर आए।
मालूम हो कि शहर के रेलवे स्टेशन इलाके में एक नई रेल पटरी बिछाने का काम जोर-शोर से किया जा रहा है । बताया जाता है कि इस दौरान रेलवे विभाग के विभागीय इंजिनियर की मौजूदगी सबसे अहम होती है और उनकी देखरेख में काम होना चाहिए लेकिन जिस समय मालगाड़ी बेपटरी हुई रेलवे के इंजिनियर महोदय मौके से नदारद रहे। जबकि नई रेलवे लाइन के ट्राएल रन के समय विभागीय इंजिनियर की अहम भूमिका रहती है। खबर ये भी है कि जब से नई रेल लाइन बिछाने का काम शुरू किया गया है तब से रेलवे विभाग के जिम्मेदार अधिकारी केवल खानापूर्ति के लिए मौके पर नजर आते हैं। फलस्वरूप उनकी गैरमौजूदगी, गैरजिम्मेदारी एवं लापरवाही की वजह से सप्ताह के भीतर एक हि रेल पटरी पर फिर एक बार मालगाड़ी बेपटरी हुई। वैसे भी हर रोज हर दस पंद्रह मिनट के अंतराल में रेलवे फाटक बंद रहने से फाटक के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। इस मौके पर सबसे ज्यादा प्रभावित एंबुलेंस सेवा होती है जो घंटों जाम में फंस जाती है।वहीं दूसरी ओर फाटक के दोनों ओर खड़े हुए लोगों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वैसे भी शहर की ट्रैफिक समस्या बहुत ही पुरानी है और इससे निजात दिलाने के लिए विगत तीन साल पहले ओवरब्रिज बनाने का निर्माण कार्य शुरू किया गया था जो आज भी राज्य सरकार व जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते अधर में लटका हुआ है।
शहरवासियों की पचास साल के लंबे इंतजार के बाद 2018 में इस ओवरब्रिज निर्माण कार्य शुरू किया गया था लेकिन राज्य सरकार व जिला प्रशासन की उदासीनता से ऐसा लगता है कि शहरवासियों को फिर से अगले युग तक इंतजार करना पड़ेगा। इस बीच शहर में सांसद, विधायक कई कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आए लेकिन किसी ने भी ओवरब्रिज निर्माण कार्य के बारे में पहल करने की कोशिश नहीं की ।
खबर ये भी है कि पीडब्ल्यूडी विभाग व तहसील कार्यालय की आपसी सहमति नहीं रहने के चलते ही एप्रोच रोड बनाने के लिए जमीन अधिग्रहण का काम भी ओवरब्रिज निर्माण के साथ अधर में लटक गया है।।





