उच्च न्यायालय में दिखा प्रकृति प्रेम लगाए गए हरिशंकरी पौधे
उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खण्डपीठ लखनऊ में न्यायमूर्तिगणों एवं लोक भारती अधिवक्ता परिवार द्वारा हरिशंकरी पौधारोपण तत्पश्चात संगोष्ठी का सफल आयोजन।
दिनांक 8.10.2025 को माननीय उच्च न्यायालय लखनऊ में लोक भारती अधिवक्ता परिवार के सदस्य रामेन्द्र त्रिपाठी (राज विधि अधिकारी ) के नेतृत्व में हरिशंकरी पौधारोपण उसके उपरांत एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में सर्वप्रथम हरिशंकरी
( पीपल , पाकड़ , बरगद एक साथ एक मीटर की त्रिज्या में ) पौधारोपण किया गया। यह पौधारोपण न्यायमूर्तिगणों क्रमशः मुख्य अतिथि सौरभ लवानिया, विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति राजीव सिंह , न्यायमूर्ति एस० क्यू०एच०रिजवी , न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला , सम्मानित अतिथिगणों क्रमशः राघवेंद्र सिंह ( वरिष्ठ अधिवक्ता , पूर्व महाधिवक्ता , संरक्षक लोक भारती अधिवक्ता परिवार ) , सूर्यभान पाण्डेय वरिष्ठ अधिवक्ता ( डिप्टी सालीसीटर जनरल ऑफ इंडिया उच्च न्यायालय लखनऊ ) कुलदीप पति त्रिपाठी ( अपर महाधिवक्ता उत्तर प्रदेश सरकार ) वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता विजेन्द्र पाल सिंह ,
गोपाल उपाध्याय , श्रीकृष्ण चौधरी व कृष्णानंद राय
अवधवर के अध्यक्ष पंडित चंद्र व महासचिव सहित तमाम अधिवक्तागण द्वारा किया गया ।

तत्पश्चात महामना मदन मोहन मालवीय सभागार में पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन में पौधारोपण ( हरिशंकरी , पौधारोपण ) का महत्व विषय पर संगोष्ठी की शुरुआत हुई । सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया उसके उपरांत देवी माता सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद महामना के चीत्र पर माल्यार्पण किया गया ।
कार्यक्रम संगोष्ठी के मंच का संचालन राजीव श्रीवास्तव राजा
( अपर मुख्य स्थाई अधिवक्ता ) संयोजक लोक भारती अधिवक्ता परिवार द्वारा किया गया । संपूर्ण कार्यक्रम के संयोजक का कार्य रामेन्द्र त्रिपाठी , सह-संयोजक का दायित्व दिलीप पाण्डेय ने निर्वहन किया,
कार्यक्रम में समन्वय की भूमिका में अजय कुमार सिंह 'राज ' , सह-समन्वयक के दायित्व का निर्वहन सौरभ शुक्ला
( स्थाई अधिवक्ता उत्तर प्रदेश सरकार) द्वारा किया गया
निवेदक मंडल में सम्मिलित सभी अधिवक्तागणों द्वारा सभी सम्मानित न्यायमूर्तिगणों व सामाजिक कार्यकर्ताओं व वरिष्ठ अधिवक्ताओं का स्वागत किया गया । कार्यक्रम का अध्यक्षीय उद्बोधन पंडित यश चंद्रा अध्यक्ष अवधबार द्वारा किया गया । अध्यक्ष ने उच्च न्यायालय में हरिशंकरी वृक्षारोपण होने पर खुशी व्यक्त किया।लोकभारती से पधारे वरिष्ठ समाजसेवी बृजेंद्र पाल सिंह ने सभी आगंतुकों के मध्य हरिशंकरी के विषय में विस्तार पूर्वक बताया साथ ही 12 जिलों में हरिशंकरी पौधारोपण होने बारे में भी विस्तार से विषय को रखा और लोकभारती के कार्य कलापो एवं उसके सभी आयामों के बारे में भी संक्षिप्त जानकारी प्रेषित किया ।उसके पश्चात न्यायमूर्तिगणों द्वारा भी पर्यावरण पर अपने-अपने विचार रखे गये। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया ने अपना वाक्तब्य रामचरितमानस की पंक्त्तियों की चर्चा के साथ शुरू किया।
तुलसी तरुवर विविध सुहाये कहूं-कहूं सिय कहूं लखन लगाएं
मुख्य अतिथि ने सभी अधिवक्ताओं से आवाहन किया कि आप लोगों द्वारा अपने जीवन में प्रत्येक दिन कुछ ना कुछ अच्छे कार्य किए जाते हैं उसमें सबसे ज्यादा अच्छा कार्य वृक्षारोपण हो सकता है और साथ ही खासकर हरिशंकरी पौधारोपण को अपने सर्वोत्तम वृक्षारोपण बताया ।
साथ ही आपने आयोजक मंडल से व अवधबार के पदाधिकारियों से आवाहन किया कि आप बार में पंजीकरण करते समय अधिवक्ताओं को संजीव पौधों को भेंट करें। व बार में आए अतिथियों को भी संजीव पौधा ही भेंट करेंगे तो अच्छा रहेगा। मुख्य अतिथि के इस सुझाव को लोक भारती अधिवक्ता परिवार व अवधबार ने पालन करने का आश्वासन दिया है ।

इसी क्रम में अवधबार के महासचिव ललित तिवारी ने कहा कि यदि हम सभी अधिवक्ता बन्धुओं को अपने आप को आने वाली पीढ़ियों और समाज के मन में जीवित रखना है तो सबसे अच्छा कार्य वृक्षारोपण ही हो सकता है ।
अंत में कार्यक्रम के संयोजक रामेन्द्र त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि सौरभ लवानिया , अध्यक्षता कर रहे बार के अध्यक्ष पंडित यश चंद्रा , सभी मंचासीन माननीय न्यायमूर्तिगण व सामाजिक कार्यकर्ताओं व कार्यक्रम में सम्मिलित सभी अधिवक्ताओं व अन्य वरिष्ठ अधिवक्तागणों , अतिथिगणों का धन्यवाद ज्ञापन किया ।
इस कार्यक्रम में लोकभारती अधिवक्ता परिवार के तरफ पंकज श्रीवास्तव (अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता )
अशोक सिंह , रजत कुमार सिंह , विपिन कुमार मिश्रा , नीलम श्रीवास्तव , राजकुमार सिंह , गोपाल शुक्ला , अरविंद त्रिपाठी , ओम नारायण मिश्रा ,कार्तिक यादव , नरेंद्र मिश्रा , विनोद कुमार पाण्डेय , रविकांत मिश्रा , प्रगति सिंह ,कामना पाण्डेय ज्ञानेंद्र त्रिपाठी , वैभव मिश्रा , धनंजय मौर्य सहित सैकड़ो सम्मानित अवधिवक्तागण मौजूद रहे ।





