इस्पात साहित्य संसद में फकीर मोहन जयंती मनाई गई
राउरकेला की अग्रणी साहित्यिक संस्थान इस्पात साहित्य संसद के तत्वावधान में फकीर मोहन सेनापति की 184वीं जयंती अत्यंत समारोहपूर्वक सेक्टर-7 स्थित कार्यालय में आयोजित की गई। इस सभा की अध्यक्षता अध्यक्ष नृसिंह चरण विश्वाल ने की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राउरकेला इस्पात संयंत्र के पूर्व कार्यकारी निदेशक प्रदीप कुमार साहू उपस्थित थे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात लेखिका एवं प्राध्यापिका महाश्वेता साहू ने शिरकत की। उन्होंने 'फकीर मोहन के साहित्य में समकालीन चित्रण' विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि फकीर मोहन का साहित्य समाज के परिवर्तन के लिए प्रेरित था और उनके साहित्य की कोई तुलना नहीं है।
अतिथियों ने सर्वप्रथम महाप्रभु श्री जगन्नाथ की प्रतिमा के समक्ष पुष्प एवं धूप अर्पित कर दीप प्रज्वलित किया। ज्योतिर्मय आचार्य और गजेंद्र मुर्मू द्वारा प्रारंभिक संगीत गान के साथ सभा की शुरुआत हुई।
महासचिव मनोज कुमार नंद ने सभा का संचालन किया और कार्यकारी अध्यक्ष प्रताप कुमार पंडा ने स्वागत भाषण के साथ अतिथियों का परिचय कराया।
इस अवसर पर अतिथियों द्वारा साहित्य संसद के वार्षिक कैलेंडर का विमोचन किया गया। जगन्नाथ सरस्वती और नीलमणि पात्र की स्मृति में आयोजित विद्यालय स्तरीय कहानी लेखन प्रतियोगिता के 11 सफल छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। कवित्री सुमित्रा बारिक को 'कुंतला कुमारी देवी स्मृति पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।
सह-महासचिव सुशांत कुमार नायक के पुत्र को वीर सुरेंद्र साय तकनीकी विश्वविद्यालय (VSSUT) से स्नातकोत्तर में स्वर्ण पदक प्राप्त करने हेतु सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दूसरे चरण में कवयित्री विजयिनी जेना की अध्यक्षता में एक भव्य कविता पाठ कार्यक्रम आयोजित हुआ। इसका संयोजन खगेंद्र बेहरा, सुमित्रा मिश्रा और सुचित्रा लेंका ने किया।
इस सत्र में निकुंज बिहारी दास, रघुबर धल, मंजुला कुमारी रथ, सत्यव्रत दास, डॉ. किशोरी दास, ममता जेना, सुमित्रा बारिक, भीमसेन साहू, प्रताप कुमार पंडा, सुस्मिता महापात्र, निशिकांत मिश्रा, हरमोहन मिश्रा, सरोज कुमार दास, गौतम दास, सस्मिता प्रधान, कुंज बिहारी राउत, सुशांत नायक, खगेंद्र बेहरा, सुमित्रा मिश्रा, सबिता परिडा और अभिराम प्रधान जैसे प्रमुख कवियों ने कविता पाठ किया।
इस अवसर पर त्रिलोचन मथान, डॉ. कृपासिंधु नायक, तारिणी चरण साहू, ममता कुमारी जेना, सुदाम चरण दास, शर्मिष्ठा कवि शतपथी, ब्रजेंद्र दास, बलराम दास, चित्त रंजन ब्रह्मा, सबिता बस्तिया, प्रबीर कुमार दुबे, डॉ. शक्ति प्रसाद सामंतराय, अजय कुमार पाणी और निहारिका बस्तिया सहित अनेक लेखक एवं बुद्धिजीवी उपस्थित रहे।
अंत में सुशांत नायक ने धन्यवाद ज्ञापित किया।





