अन्नदान का महापर्व छेरछेरा हर्षोल्लास संपन्न

अन्नदान का महापर्व छेरछेरा हर्षोल्लास संपन्न

नितिन सिन्हा (संपादक खबरसार)

अन्नदान का महापर्व छेरछेरा पौष मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ के सर्वप्रमुख त्योहारों में से एक छेरछेरा विशुद्ध खेती-किसानी से संबंधित है जिसे राज्य के निवासी उत्साहपूर्वक मनाते हैं। पारंपरिक खेती किसानी से निवृत्त हो किसान आनंद और उल्लास प्रकट करते हुए एक दूसरे को बधाई और मंगलकामनाएं देते हैं। धरती माता का आभार व्यक्त करते हुए पूरे उत्साह के साथ अन्न-धनदान करते हैं। 
प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी प्राचीन संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखते हुए लोगों द्वारा एक-दूसरे की दहलीज पहुंच कर अन्नदान लिया-दिया गया और इस महापर्व की शुभकामनाएं दी गई। 
छेरछेरा त्योहार भारतीय संस्कृति की पुरातन अन्न-धनदान की परम्परा से संबंधित है। परमार्थ की भावना जनसामान्य में युगों-युगों से बनी हुई है। युगों तक यह पावन सिलसिला बना रहे, इसी की अंतर्निहित अभिव्यक्ति का स्वरूप है। 
आज भी बच्चे बड़े बुढ़े सभी का उत्साह यह साबित करता है कि आधुनिकता के बादल कितने ही गहरे हो जाएं हमारी स्वाभाविक परहित परमार्थ की पुरातन संस्कृति को धूमिल कर पाना असंभव है। 
 इस पावन ठेठ छत्तीसगढ़ी त्योहार में आज भी 'छेरछेरा.... माई कोठी के धान ल हेरहेरा' कहते बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों की टोली देखी गई। ढोल मंजीरे के साथ गाते-बजाते लोग इस पर्व के महत्व का बखान करते देखे गए। 
 पौष पूर्णिमा छेरछेरा संपूर्ण छत्तीसगढ़ के साथ-साथ खरसिया तहसील के शहरी ग्रामीण सभी जगहों में उत्साह के साथ मनाया गया। परम्परागत छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के लुत्फ उठाए गए। अन्न-धनदान कर धरती माता की अन्न कोठरी सदैव भरी रहे इसकी प्रार्थनाएं की गईं ।