72 वर्षीय बृद्धा बिरसी ओराम को चार महिनों‌ से नहीं मिली बृद्धा भत्ता

72 वर्षीय बुजुर्ग महिला को चार महीने से नहीं मिला वृद्धा भत्ता, पंचायत कार्यालय में ताला और अधिकारियों की उदासीनता पर उठे सवाल

 नुआगांव: जिले के नुआगांव प्रखंड अंतर्गत उरमेई ग्राम पंचायत की रहने वाली 72 वर्षीय वृद्धा बिरसी ओराम इन दिनों प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की सुस्ती का दंश झेलने को मजबूर हैं। पिछले चार महीनों से उन्हें सरकार द्वारा मिलने वाला वृद्धा भत्ता नहीं मिला है, जिससे उनका दैनिक जीवन मे आर्थिक संकट उत्पन्न हो गई है।
पीड़ित महिला के अनुसार, उन्हें इससे पहले भी तीन महीने का भत्ता नहीं मिला था। काफी मशक्कत के बाद तीन महीने के अंतराल पर केवल दो महीने का ही भुगतान किया गया। इसके बाद अब लगातार चार महीनों से उन्हें एक भी रुपया नहीं मिला है। इस तरह की वित्तीय अनियमितता और लगातार महीनों तक भुगतान रुक जाने के पीछे क्या कारण है, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
इस मामले में जानकारी प्राप्त करने के लिए सोमवार को लगभग 3:00 बजे जब उरमेई ग्राम पंचायत कार्यालय का दौरा किया गया, तो वहां ताला लटका मिला। अपनी इस समस्या के समाधान के लिए 72 वर्षीय बिरसी ओराम पिछले चार महीनों से लगातार पंचायत कार्यालय और नुआगांव डाकखाने के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उन्हें हर बार निराशा ही हाथ लगी है। उनके घर से नुआगांव डाकखाने की दूरी लगभग 11 से 13 किलोमीटर तक हो सकती है। इस ढलती उम्र में कमजोर शरीर और कांपती पैरों के साथ इतनी लंबी दूरी तय करना उनके लिए शारीरिक रूप से बेहद कष्टदायक साबित हो रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों का इस ओर ध्यान न देना उनकी कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
यह मामला जब मीडिया के संज्ञान में आया, तब प्रशासनिक लापरवाही की यह परतें खुलकर सामने आईं। लेकिन सवाल यह उठता है कि मीडिया की नजरों से दूर ऐसे और कितने बेसहारा बुजुर्ग होंगे जो प्रशासनिक लालफीताशाही और उदासीनता के कारण इस तरह की पीड़ा से गुजर रहे हैं? क्या योजनाओं का लाभ धरातल पर पहुंचाने के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच हो, ताकि दोषियों पर कार्रवाई की जा सके और बिरसी ओराम सहित अन्य बुजुर्गों को उनका हक समय पर मिल सके।