विस्थापित कर सकते है उग्र आंदोलन टूट रहा है सब्र का बाँध
विस्थापित समझौता समिति ( डिस्प्लेस सेटलमेंट कमिटी), आंचलिक सुरक्षा समिति और 32 मौजा विस्थापित समिति एकसाथ एक मंच पर आए, इन तीनो समितियों से जुड़े मुख्य लोगों ने राउरकेला के उदित नगर में एक बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की।
इस बैठक का मूल उद्देश्य बिस्थापितो को भूमि का मालिकाना हक़ देने के साथ साथ राउरकेला इस्पात संयंत्र, भारतीय रेल तथा राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार की विभिन्न परियोजनाओ जिसके कारण लोग बिस्थापित हुए है उन सभी संस्थाओ मे बिस्थापितो को नौकरी देने के साथ साथ बिस्थापितो को ज़मीन के बदले ज़मीन देने पर जोर दिया गया है ।
बैठक के आरंभ मे डिस्प्लेस सेटलमेंट कमिटी के महा सचिव रबिन्द्र भूमिज ने सभी विस्थापित समिति को एक होकर काम करने पर जोर दिया, और विस्थापित समझौता समिति के अध्यक्ष श्रीमती हेमा एक्का ने तमाम राज्यों सरकार और केंद्र सरकार की संस्थाओ मे बिस्थापितो को नौकरी देने तथा ज़मीन के बदले मे ज़मीन देने पर जोर दिया है ।32 मौजा डिस्प्लेस कमिटी के उपाध्यक्ष श्री अंसारी ने भी अपना सहमति जताया है,
वही आंचलिक सुरक्षा कमिटी के अध्यक्ष डेमे ओराम ने राज्य सरकार द्वारा लाई गई बिस्थापित कानून को स्वंय प्रसाशनीक स्तर पर नहीं मानने तथा प्रसाशन द्वारा दादागिरी कर के बिस्थापितो को जेल मे डालने तथा शारीरिक तथा मानसिक यातनाये देने पर दुःख जताया है। उन्होने कुकडा़ फाटक के पास धरना के दौरान हुई गिरफ्तारी की याद ताजा करते हुए रेलवे मार्सिंलिंग यार्ड केेलिए बिस्थपित हुए लॉगो को रेल मे नौकरी देने तथा ज़मीन के बदले ज़मीन देने पर जोर दिया है ।
बैठक में सभी ने इस बात पर सहमति जताई कि यदि प्रशासन बिस्थापितो को ज़मीन के बदले ज़मीन और नौकरी नहीं देती है ऐसी स्थिति में सभी बिस्थापित कमिटी मिलकर आन्दोलन करने तथा सड़क पर उतरने के लिए मजबुर होगा, जिसकी जिम्मेदारी खुद प्रशासन को लेनी होगी, कारण सालो साल बिस्थपित जनता प्रशासन के द्वार द्वार दौड़ने के बाद भी प्रशासन बिस्थापितो की समस्याओ का समाधान नहीं कर पाई ।
आज के इस बैठक मे कार्तिक भूमिज ने प्रशासन को संबोधित करते हुए से कहा है कि जिन खाली पडी़ ज़मीन मे बाहरी लोग आकर घर और दुकान बनाकर सालो से रह रहे है उन लॉगो को तुरंत खाली कराकर उस ज़मीन मे प्रशासन परियोजनाये स्थापित की जाये ताकि बिस्थपितो को कोई समस्या ना हो पाये।





