विक्षिप्त पति को भटकता छोड़ भागखडी़ हुई राजकुमारी

विक्षिप्त पति को भटकता छोड़ भागखडी़ हुई राजकुमारी

जो राजकुमारी चौधरी अपने पति और अपाहिज बेटी का वास्ता देकर  देवर के बनाए हुए घर में जबरदस्ती हिस्सा माँग रही है।वही राजकुमारी चौधरी पति के मानसिक स्थिति बिगड़ने पर पति को भटकता छोड़कर भागखडी़ हुई।
जब उसका पति पागलपन की स्थिति में भटकता हुआ राउरकेला के नये बस अड्डे पर देखा गया तो किसी माध्यम से राजकुमारी तक यह खबर पहुंचाई गई पर राजकुमारी चौधरी अपने पति को देखने तक नही आई और उनके पति को किसी परिचित ने अस्पताल में भर्ती करवाकर उनके भाइयों को खबर दी। जिसपर उनके छोटे भाई ने खबर मिलते ही उसतक पहुँचे और उनके चिकित्सा की जिम्मेदारी ली। 
इससे पहले भी लाॅकडाउन के समय राजकुमारी का पति अपनी पत्नी और उसके मायके वाले की प्रताड़ना के कारण अपना मानसिक संतुलन खोकर आत्महत्या करने के इरादे से रेल पटरी पर निर्वस्त्र होकर लेट गया था। जिसे उनके विद्यार्थी और बस्ती के लोगो ने उसकी पत्नी तक पहुंचाया पर निर्दयी राजकुमारी ने अपने पति का दायित्व लेने से साफ इंकार कर दिया। जब इस बात की खबर उनके भाईयो को लगी तो इसी छोटे भाई ने उसे आई.जी.एच के मानसिक रोग विभाग में भर्ती करवाया था। और राजकुमारी चौधरी अपने मायके में ऐस करती रही।

इतना ही नही राजकुमारी चौधरी की अलग रहने की जिद को लेकर रोज रोज के झगड़े से तंग आकर उसके पति ने परिवार से अलग रहना स्विकार किया था। उसके बाद राजकुमारी चौधरी अपने ससुराल वालो से इस तरह मुंह मोड़ ली की उसने अपने ससुर की मृत्यु पर भी जाना उचित नही समझा, ननद व देवर की शादी हो या ससुराल पक्ष के किसी रिश्तेदार के यहाँ मौत भी हो जाए तो वह नही जाती थी।
यहाँ प्रश्न उठता है जो राजकुमारी अपने पति को मरणासन्न अवस्था में छोड़कर चली गई वह किस अधिकार से पति पर अपना हक जताती है उनसे अलग घर और खर्च के पैसे मांगती है।