विकसित भारत 2047 कार्यशाला का आयोजन
प्रेस विज्ञप्तिः राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान राउरकेला
एनआईटी राउरकेला ने मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग के समन्वय में "विकसित भारत@2047" कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य 2047 तक भारत में बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा प्राप्त करने के लिए अभिनव विचार उत्पन्न करना था। इस कार्यशाला में प्रमुख वक्ताओं, विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को एक साथ लाया गया, जिन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा में रणनीतिक हस्तक्षेपों पर चर्चा की, और 2047 तक एक विकसित भारत की परिकल्पना की।
इस कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिभागियों के पंजीकरण से हुई, जिसके बाद सीनेट हॉल में उद्घाटन सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कार्यक्रम समन्वयक प्रो. जलंधर प्रधान के स्वागत भाषण के साथ हुआ। उन्होंने कहा, "हम यहां विभिन्न सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का समाधान करने के लिए एकत्र हुए हैं ताकि समग्र, उच्च-गुणक्ता और किफायती स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा प्राप्त की जा सके। हमारा लक्ष्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करके विचार उत्पन्न करना है, जैसे कि जेब से खर्च होने वाले स्वास्थ्य संबंधित खर्च को कम करना और स्कूल छोड़ने की दर को कम करना और सरकारी योजनाओं और प्रस्तावित पहलों में प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करना हैं।"
एनआईटी राउरकेला के रजिस्ट्रार ने दर्शकों को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों में योगदान के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को अपने दैनिक जीवन में 'कम करें (रिड्यूस), पुनः उपयोग (रियूज़) करें और पुनःचक्रण (रिसाइकल) करें का अभ्यास करके अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का आग्रह किया और बिजली और भोजन की बर्बादी से बचने पर बल दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि एनआईटी राउरकेला की विकसित भारत पहल के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा विषयक क्षेत्र हैं, और संस्थान राष्ट्रीय विकास की दिशा में हमारे सामूहिक प्रयासों को सुदृढ़ करने के लिए इसी तरह की घटनाओं का आयोजन करता रहेगा।
एनआईटी राउरकेला के प्रभारी निदेशक प्रो.. प्रदीप सरकार ने राष्ट्रपति संबोधन में देश के निम्न खुशहाली सूचकांक में योगदान करने वाले प्रमुख कारकों जैसे जनसंख्या वृद्धि, कृषि संकट, पर्यावरण प्रदूषण, जलवायु संकट, बेरोजगारी, निम्न जीवन स्तर, कुपोषण, लैंगिक अंतराल और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर की उच्च दर की पहचान की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन मुद्दों का समाधान करना विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक है। प्रो. सरकार ने कहा, "एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में, हमारी, इन चुनौतियों में से कुछ के लिए व्यावहारिक और क्रियान्वयन योग्य समाधान विकसित करने और एक व्यापक रिपोर्ट का प्रस्ताव करने की जिम्मेदारी है। यह हमारा अवसर है कि हम समाज के कल्याण के लिए अपनी समस्या समाधान रणनीतियों को प्रदर्शित करें। मुझे उम्मीद है कि यह कार्यक्रम छात्रों को एक प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाने और इन महत्वपूर्ण मुद्दों को व्यावहारिक रूप से हल करने के लिए एक रोडमैप बनाने के लिए प्रेरित करेगा।"
कार्यशाला में मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) अखिल बिहारी ओटा आईएएस (सेवानिवृत्त), पूर्व निदेशक एसटीएससी आरटीआई की उपस्थिति थी, जिन्होंने एक प्रेरक संबोधन दिया। उन्होंने कहा, "सुंदरगढ़ जिले के लिए यह महत्वपूर्ण है कि एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसी (आईटीडीए) को आवश्यक समर्थन प्रदान करके और स्वास्थ्य और शैक्षिक बुनियादी ढांचे की कमियों को दूर करके इसे सुदृढ़ किया जाए। इस प्रयास का समन्वय राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जैसी पहलों के साथ किया जाना चाहिए और जिला स्तर पर सीएसआर निधियों का प्रभावी ढंग से उपयोग करके समर्थित किया जाना चाहिए। इसके अलावा, हमें अपनी संस्थाओं के भीतर 'विकसित भारत' की व्यापक दृष्टि के साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की गुणक्ता में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। साल 2036 में अपने ओडिशा राज्य का 100वें वर्षगांठ मनाया जाएगा, इस साल एनआईटी राउरकेला भी अपना 75वीं स्था पना दिवस मनाएगा, इसलिए मैं सुझाव देता हूं कि संस्थान को इस महत्वपूर्ण दिवस के लिए अभी से एक दूरदर्शी योजना विकसित करनी चाहिए।"
[8/22, 5:51 PM] Dr. H. H.sambhu chaudhary: इस कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा के क्षेत्र में चार आमंत्रित व्याख्यान दिए गए। मेडटेल (Med Tel) हेल्थकेयर के सह-संस्था पक और सीईओ डॉ. ललित मानिक ने "प्रौद्योगिकी का उपयोगः 21वीं सदी में सार्वजनिक स्वास्थ्य को उन्नत बनाने के लिए एआई और डिजिटल स्वास्थ्य" पर एक व्याख्यान दिया। ओडिशा सरकार के पूर्व सार्वजनिक स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बालकृष्ण पांडा ने "समग्र स्वास्थ्य में स्वास्थ्य सूचना और शिक्षा के एकीकृत दृष्टिकोण" पर एक विचारशील व्याख्यान दिया। उन्होंने सामुदायिक स्तर पर स्वास्थ्य साक्षरता को संबोधित करने के महत्व पर भी चर्चा की।
यूनिसेफ के पोषण विशेषज्ञ श्री सौरव भट्टाचार्य ने "पोषण में निवेशः स्वास्थ्य में सुधार और स्वास्थ्य सेवा की लागत को कम करने के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप" पर एक व्याख्यान दिया। एनआईटी राउरकेला के कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रत्नाकर दाश ने "स्वास्थ्य सेवा में एआई का एकीकरण" पर चर्चा की और स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकी के भविष्य पर मूल्यवान दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।
कार्यशाला में "युवा आवाज़ेंः कार्य योजना के लिए बातचीत" शीर्षक से एक इंटरैक्टिव सत्र भी शामिल था, जिसमें प्रतिभागियों ने कार्यशाला के दौरान प्राप्त अंतर्दृष्टि के आधार पर क्रियान्वयन योग्य कदमों की पहचान के लिए समूह चर्चाओं में भाग लिया। सत्र ने शैक्षिक संदर्भों में परिवर्तनों को लागू करने और निरंतर सहयोग और ज्ञान साझा करने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. जलंधर प्रधान के समापन संबोधन के साथ हुआ जिसमें कार्यशाला से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों और अंतर्दृष्टियों को संक्षेप में प्रस्तुत किया।
एनआईटी राउरकेला में "विकसित भारत @2047" कार्यशाला एक बड़ी सफलता थी, जिसने 2047 तक एक स्वस्थ और अधिक शिक्षित भारत के निर्माण की दिशा में सार्थक संवाद और सहयोग के लिए एक मंच प्रदान किया।





