वांछित माओवादी शुक्रु का आत्मसमर्पण

वांछित माओवादी शुक्रु का आत्मसमर्पण

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

भुवनेश्वर: 25 मार्च- ओडिशा में माओवादी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है। राज्य में पुलिस द्वारा चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियान को उस समय  बड़ी सफलता मिली है जब राज्य के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल कोसा सोड़ी उर्फ शुक्रु ने मंगलवार (24 मार्च) को कंधमाल जिले में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

शुक्रु, जिस पर 55 लाख रुपये का इनाम घोषित था, ने कंधमाल जिले में अपने चार अन्य साथियों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उसने एक एके-47 राइफल के साथ आत्मसमर्पण किया।
पुलिस ने यह जानकारी दी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र सरकार द्वारा नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए 31 मार्च की समयसीमा निर्धारित की गई है। ऐसे में इसे ओडिशा पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने बताया कि शुक्रु,  राज्य में सक्रिय प्रमुख माओवादी नेताओं में से एक था। राज्य पुलिस लंबे समय से शुक्रु को पकड़ने के प्रयास कर रही थी। वह माओवादी संगठन का राज्य  कमेटी सदस्य था और कई वर्षों से कंधमाल क्षेत्र में सक्रिय था और करीब 13 नक्सलियों के समूह “एट्थ कंपनी (Eighth Company)” का नेतृत्व कर रहा था। पुलिस उसके आत्मसमर्पण के लिए लगातार अपील कर रही थी। डीजीपी वाई बी खुरानिया ने इसे बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि इससे राज्य में माओवादी नेतृत्व के कमजोर होने का संकेत मिलता है।

पुलिस ने बताया कि शुक्रु माओवादियों के आत्मसमर्पण के रुझान के खिलाफ था। इसी साल जनवरी में उसने कथित तौर पर अपने ही साथी अन्वेष की हत्या कर दी थी, जो आत्मसमर्पण करना चाहता था। बाद में उसका शव जंगल में दफना दिया गया। इस मामले में शामिल एक अन्य सदस्य जोगेश फरवरी में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया।
अधिकारियों के अनुसार, 
सुरक्षा बलों — एसओजी, सीआरपीएफ और बीएसएफ — की लगातार कार्रवाई, ड्रोन निगरानी और सीमावर्ती क्षेत्रों (कंधमाल, रायगढ़ा, कालाहांडी) में घने जंगलों में खुफिया आधारित सर्च ऑपरेशन की बढ़ती घेराबंदी के कारण शुक्रु 
दबाव में था और आत्मसमर्पण को विवश हो गया।  

एंटी-नक्सल एडीजी संज़ीब पंडा के अनुसार, यह आत्मसमर्पण राज्य को 31 मार्च 2026 तक माओवादी मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में अहम कदम है।इस बीच, विधानसभा में कांग्रेस विधायक तारा प्रसाद बहिनिपति के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 23 मार्च को कहा कि केंद्र सरकार की सिक्योरिटी रिलेटेड एक्सपेंडिचर (SRE) योजना के अनुसार वर्तमान में केवल कंधमाल जिला ही माओवादी प्रभावित माना जाता है। मुख्यमंत्री  ने विधानसभा में बताया कि अब राज्य में केवल 15 माओवादी सक्रिय बचे हैं, जिनकी मौजूदगी सीमावर्ती इलाकों तक सिमट गई है। राज्य के अन्य हिस्सों में माओवादी गतिविधियां नहीं के बराबर हैं। सरकार ने 31 मार्च तक ओडिशा को पूरी तरह माओवादी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

राज्य में पिछले दो वर्षों में 96 माओवादी और मिलिशिया सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
हाल के दिनों में 11 मार्च को सानू पोट्टम के नेतृत्व में 10 माओवादियों और 15 मार्च को नकुल के नेतृत्व में 11 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। अधिकारियों का मानना है कि शुकरू के आत्मसमर्पण से बाकी उग्रवादियों को भी मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य के “माओवादी मुक्त”  बनने के लक्ष्य को गति मिलेगी।