भारत के महान धावक मिल्खा सिंह का 91 वर्ष कि उम्र में निधन
रामप्रवेश चौधरी ( संवाददाता )
राजगांगपुर : बालुका शिल्पी राजू साहू ने फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह को बालू की आकृति बनाकर दी श्रद्धांजलि .
सुंदरगढ़ जिला के राजगंगपुर शहर निवासी अंतरराष्ट्रीय बालू शिल्पकार राजू साहू ने अपने कलाकृतिय के माध्यम से फ्लाइंग सिख के ख़िताब से नवाजे गए मिल्खा सिंह के निधन पर कलाकृति बनाकर श्रद्धांजलि दी है | इस महान हस्ती के स्वर्गवास पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है | स्वर्गीय मिल्खा सिंह कोमनवेल्थ गेम्स में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले पहले भारतीय थे | मिल्खा सिंह कि मौत से महज पाँच दिन ही उनकी पत्नी की मौत हो गई थी |
भारत के महान धावक मिल्खा सिंह का 91 वर्ष कि उम्र में निधन हो गया है | भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर शोक जताया है | आप को बता दें कि बीते दिन उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ जाने से हालत नाजुक हो गई थी | सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उन्हें फिर से बुखार आ गया था और उनका ऑक्सीजन स्तर भी काफी कम हो गया था | 91 वर्षीय के मिल्खा सिंह कोरोना संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती किए गए थे,जहाँ चिकित्साधीन अवस्था में उनका निधन हो गया है |
बताते चले कि मिल्खा सिंह का कोविड-19 परीक्षण बुधवार को निगेटिव आया था, जिसके बाद उन्हें कोविड गहन चिकित्सा कक्ष से सामान्य चिकित्सा कक्ष में स्थान्तरित कर दिया गया था,लेकिन गुरुवार को उनकी तबीयत काफी बिगड़ गई थी |
मिल्खा सिंह का जन्म 20 नवम्बर 1929 को पाक अधिकृत गोविंदपुरा में एक सिख परिवार में हुआ था | उनका बचपन बेहद कठिन दौर से गुजरा. भारत के विभाजन के बाद हुए दंगों में मिल्खा सिंह ने अपने मां-बाप और कई भाई-बहन को खो दिया | बचपन से ही उनके अंदर दौड़ने का जुनून सवार था, वो अपने घर से स्कूल और स्कूल से घर की 10 किलोमीटर की दूरी दौड़ कर तय करते थे |
पाकिस्तान के अब्दुल खालिक के साथ हुई दौड़ में हालात मिल्खा के बिपरीत था | और पूरा स्टेडियम अपने हीरो का जोश बढ़ा रहा था लेकिन मिल्खा की रफ्तार के सामने खालिक टिक नहीं पाया | रेस के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति फील्ड मार्शल अयूब खान ने मिल्खा सिंह को 'फ्लाइंग सिख' का नाम दिया और कहा 'आज तुम दौड़े नहीं उड़े हो, इसलिए हम तुम्हें फ्लाइंग सिख का खिताब देते हैं.' इसके बाद से ही वो इस नाम से दुनिया भर में मशहूर हो गए. खेलों में उनके अतुल्य योगदान के लिये भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित किया है |
मिल्खा सिंह की पत्नी 85 वर्षीय निर्मला कौर की मृत्यु भी रविवार को चंडीगढ़ के इसी अस्पताल में हुई थी। कौर देश की महिला वॉली बॉल टीम की कैप्टन रह चुकी थीं। कोरोनावायरस संक्रमण के कारण घर में कुछ दिन रहने के बाद 3 जून को उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
जिंदगी में उन्होंने बहुत बड़े मुकाम हासिल किए और देश का नाम ऊंचा किया । लेकिन आखिरी दिनों में मिल्खा सिंह की जंग जीत नही पाए। ऐसे महान खिलाड़ी और प्रेरणादाई मिल्खा सिंह को सारांश दैनिक न्यूज की और से भावपूर्ण श्रद्धांजलि और नमन |





