पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का गणना सूचीकरण शुरू

पुरी जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार का गणना सूचीकरण शुरू

सतीश शर्मा (उप संपादक) 

भुबनेश्वर 25 मार्च-  पूरी के श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्नभंडार (खजाने) की गणना का इंतजार अब खत्म हो गया है। इसमें मौजूद रत्न‑आभूषणों की गिनती के लिए 46 साल बाद रत्नभंडार के दरवाजे बुधवार (25 मार्च)  को खोल दिए गए है।  लंबे समय से तैयारियों और प्रक्रियाओं के बाद अब यह ऐतिहासिक कार्य  मानक कार्यविधि (एसओपी ) के मुताबिक शुरू किया गया है। 

करीब पांच दशक बाद मंदिर के बहुमूल्य आभूषणों और धरोहरों का यह पहला व्यापक सर्वेक्षण किया जा रहा है।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने मंदिर विद्वानों, ज्योतिषियों और प्रबंध समिति से विचार-विमर्श के बाद इसकी विस्तृत रूपरेखा तैयार की है। यह निर्णय गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब की अध्यक्षता में लिया गया। सूचीकरण का कार्य चैत शुक्ल सप्तमी के शुभ मुहूर्त (दोपहर 12:09 से 1:45 बजे) में शुरू हुआ।

मुख्य प्रशासक डॉ. अरविंद पाढ़ी और उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष जस्टिस विश्वनाथ रथ के नेतृत्व में पूरी प्रक्रिया संचालित होगी।
अरविंद पाढ़ी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय दल के साथ दूसरे 10 सदस्यीय हैंडलिंग टीम में रत्न विशेषज्ञ, पारंपरिक स्वर्णकार, सेवायत, राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रतिनिधि और भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी शामिल हैं।

इस बार सूचीकरण में वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, 3D मैपिंग और डिजिटल कैटलॉगिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा मरम्मत किए गए रत्न भंडार में अब सुरक्षित कक्ष बनाए गए हैं।

कैसे होगा सूचीकरण

सूचीकरण के दौरान 1978 की सूची से मिलान किया जाएगा। रत्नों की पहचान विशेषज्ञ करेंगे, जबकि उनके वजन, आकार और गुणवत्ता का विस्तृत विवरण दर्ज होगा। पारंपरिक नामकरण स्वर्णकार द्वारा किया जाएगा और पूरी जानकारी ई-कैटलॉग में दर्ज की जाएगी। आभूषणों का आर्थिक मूल्यांकन नहीं किया जाएगा।

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की दैनिक पूजा-पद्धति और श्रद्धालुओं के दर्शन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। सप्ताहांत और प्रमुख त्योहारों पर सूचीकरण कार्य रोका जाएगा।

1978 में यह प्रक्रिया 72 दिनों में पूरी हुई थी। इस बार ओडिशा उच्च न्यायालय ने इसे तीन महीने में पूरा करने का निर्देश दिया है, हालांकि कार्य की व्यापकता को देखते हुए समय बढ़ने की संभावना है।

राज्य के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि पूरी प्रक्रिया तय मानक नियमों प्रक्रिया के अनुसार पारदर्शिता के साथ होगी और डिजिटल रूप में संरक्षित की जाएगी। विशेषज्ञों की भागीदारी से इस बार अधिक सटीकता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

पिछली गिनती (1978): आखिरी बार 13 मई से 23 जुलाई 1978 तक चली गिनती में 12,838 भारी (लगभग 128 किलो) सोने के आभूषण और 22,153 भारी (लगभग 221 किलो) चांदी की वस्तुएं मिली थीं।
2008 ओडिशा हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने रत्न भंडार का ढाँचागत निरीक्षण किया, लेकिन भीतरी कक्ष में प्रवेश नहीं कर सका।

वर्तमान स्थिति (2026): 46-48 साल बाद, 25 मार्च 2026 से बहुप्रतीक्षित गिनती प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है। इसका उद्देश्य रत्नों की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा का पता लगाना है।