पीएचडी विभाग की लापरवाही से त्रस्त जनता
पीएचडी विभाग की लापरवाही से सड़क के मुख्य मार्ग पर फंसा ठेला। विभाग की कार्यशैली पर उठे सवालिया निशान
रामप्रवेश चौधरी (संवाददाता)
राजगांगपुर :शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए रेलवे फाटक कि ओर जाने वाले रास्ते में शिव मंदिर के समीप शनिवार सुबह एक सामान से लदा ठेला रेलवे फाटक से गुजरने के क्रम में शिव मंदिर के समीप सड़क पर ठेले का पिछला एक चक्का सड़क पर धंस गया। अचानक ठेले का चक्का सड़क पर धंस जाने पर पीएचडी विभाग के द्वारा करवाई जा रही जल वितरण के लिए बिछाएं गए पाइप लाइन की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है इस कार्य पर प्रशन चिन्ह लगना भी स्वाभाविक है।शनिवार सुबह ठेले का चक्का फंसने का मुख्य कारण राजगांगपुर पी.एच.डी विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों के प्रति लापारवाही का जीता जागता उदाहरण है।
पीएचडी विभाग के द्वारा पाइप लाइन के काम के दौरान विभिन्न जगहों पर गड्ढा खोदने के बाद उसे सरकारी नियमों के तहत गीट्टी सीमेंट की ढलाई कर कचरे के मलबे को हटाना पाइप लाइन की मरम्मत के नियमों में शामिल है । लेकिन पीएचडी विभाग के अधिकारीयों व कर्मचारीयों द्वारा नियमों का खुलेआम उल्लंघन करने से आम जनता को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है | विभागीय अधिकारी व कर्मचारी सिर्फ खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो गए है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शिकायत करने के बाद भी अभी तक सार्थक कारवाई नहीं किए जाने के कारण ही ठेले का चक्का खोदे गए गड्ढे के मलबे में फंस गया।
यहाँ "अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता" वाली कहावत को पी.एच.डी विभाग के अधिकारीयों व कर्मचारीयों ने सार्थक बना दिया है। शहर में पानी का पाइप लाइन बिछाने और मरम्मत कार्य के लिए पी.एच.डी विभाग के द्वारा जगह जगह काम कर गड्ढे को खोदने के बाद सही से गड्ढों को न भरने के कारण हर वक्त दुर्घटना की स्थिति बनी रहती है । शनिवार सुबह 6 बजे के करीब घटी घटना है जो इन विभागों के अधिकारी व कर्मचारी की लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है।
एक तो शहर की ट्रेफिक समस्या दूसरी और पी.एच.डी विभाग की लापरवाही से शहर की आम जनता पूरी तरह त्रस्त हो चुकी है। उनका कहना हमेशा से पीएचडी विभाग की तरफ से ऐसी लापरवाही देखने को मिलती हैं जिसका खामियाजा भुगतना आम जनता को पड़ता है। आज भी शहर विभिन्न स्थानों पर गड्ढों को आधे अधूरे भर कर छोड़ दिया जाता है, जिस कारण दुर्घटना होने की संभावना से इंकार भी नहीं किया जा सकता है। वहीं दूसरी ओर लाखों रुपए की लागत से बनी सड़क को पीएचडी विभाग मिनटों मे खोदकर अपना काम करते जा रही है । और आम जनता परेशानियों का सामना कर रही है लेकिन ये हमारी विडंबना है कि प्रशासन पी एच डी विभाग की लापरवाही से भरे रवैए को देखकर भी अनजान बनी हुई है ।बार बार सड़क को तोड़ना फिर बनाना सिर्फ सरकारी पैसों की बरबादी है और कुछ नहीं । जिला प्रशासन को चाहिए कि मामले की जांच पड़ताल कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करें।





