नदीयों के पुनरूद्धार के लिए व्यापक रूप लेता आंदोलन
“जब स्याही के पत्र को न मिले इज्जत, तो खून से लिखना पड़ता है खत” — सुदामा
बस्ती जनपद की पौराणिक जीवनरेखाएं मानी जाने वाली नदियों — मनोरमा, कुआनो एवं रामरेखा — की बदहाल स्थिति, घाटों पर पसरी गंदगी और विषाक्त हो चुके जल के विरोध में चल रहा धरना एवं भूख-हड़ताल आज छठे दिन भी जारी रहा। दिन बीतने के साथ यह आंदोलन अब और उग्र होता जा रहा है और जनसमर्थन लगातार बढ़ रहा है।
आज धरना स्थल पर वरिष्ठ भाजपा नेता प्रमोद पाण्डेय एवं अभिषेक तिवारी पहुंचे। दोनों नेताओं ने आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए इसे विशुद्ध रूप से जनहित की लड़ाई बताया और कहा कि नदियों का अस्तित्व बचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
भूख-हड़ताल पर बैठे भाजपा नेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’ ने प्रशासन की उदासीनता पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “हम संख्या में कम नहीं, बल्कि ज्यादा हैं, क्योंकि हमारे साथ जनहित का मजबूत इरादा खड़ा है। हर दिन सैकड़ों लोग इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं और अपना समर्थन दे रहे हैं। नदियों की दुर्दशा अब किसी से छिपी नहीं है।”
सुदामा ने जिला प्रशासन को चेतावनी भरे स्वर में कहा कि यदि अब भी ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत कर नदियों की सफाई एवं पुनर्जीवन की दिशा में गंभीर पहल नहीं की गई, तो कल भूख-हड़ताल के सातवें दिन वे प्रशासन की वादाखिलाफी और संवेदनहीनता के विरोध में माननीय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर भेजने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि यह कदम किसी भावुकता में नहीं, बल्कि व्यवस्था की चुप्पी तोड़ने के लिए उठाया जाएगा।
धरना स्थल पर आज भी जनसमर्थन का सिलसिला अनवरत जारी रहा। इस दौरान प्रमोद पाण्डेय, आशीष तिवारी के साथ देवशरण शुक्ल, दिग्विजय नाथ पाण्डेय, राजीव पाण्डेय, महेंद्र सिंह, राहुल शर्मा, रमेश चौधरी, शकील अहमद, जुवैद, दीनबंधु उपाध्याय, राजेश सिंह, देवेन्द्र पाण्डेय, अनिल तिवारी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा उपस्थित रहे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया।
यह आंदोलन अब केवल नदियों की सफाई तक सीमित नहीं रह गया है। यह जनस्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही की लड़ाई का रूप ले चुका है। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना है कि यदि जिला प्रशासन शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाता है, तो यह जनआंदोलन और अधिक व्यापक एवं तीव्र रूप धारण करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।





