जिले में धूमधाम से मनाई गई वटसावित्री व्रत
रामप्रवेश चौधरी (संपादक)
सुंदरगढ़ जिला में राउरकेला के बसंती कॉलोनी एवं राजगांगपुर शहर में वट सावित्री के अवसर पर महिलाओं ने पति की लम्बी आयु एवं परिवार की सुख समृद्धि के लिए व्रत रखकर विधिवत किया पालन।
आज 30 जनवरी को वट सावित्री व्रत देश के कोने कोने में बड़ी धूमधाम और उत्साह से मनाया जा रहा है। राउरकेला शहर के बसंती कॉलनी एवं राजगांगपुर में भी सुहागिन महिलाओं द्वारा वट सावित्री व्रत का पालन धूम धाम एवं विधि विधान से मनाया गया ।
आज के दिन सुहागिन महिलाएं प्रातः काल स्नान करके बरगद के पेड़ की विधि विधान से पूजा कर अपने पति की लंबी उम्र के लिए कामना करती हैं. इस दिन बहुएं अपनी सास को बायना भी देती हैं और कच्चे सूत लपेटते हुए बरगद की सात बार परिक्रमा करती हैं।
अखंड सौभाग्यवती और पुत्रवती होने की कामना के लिए रखा जाने वाला यह व्रत सुहागिन महिलाओं में बहुत ही ज्यादा प्रचलित है, आज के दिन महिलाएं सोलह सिंगार करके विधि विधान से पूजा, अर्चना और आरती करती हैं।
वट सावित्री का व्रत रखने वाली महिलाएं प्रातः काल स्नान करके पूजा करती हैं. इस दौरान जल का भी सेवन नहीं करती हैं. पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ व्रत का पालन करते हुए पूजन करती हैं. वट सावित्री व्रत पूजन के लिए महिलाएं घर पर विभिन्न तरह के पकवान बनाती है. मिठाई, फल, मेवा, खीरा, ककड़ी, तरबूज, भीगा चना आदि पूजा में काम आने वाली चीजें मंगा कर पहले से रखती हैं।
व्रत के समय महिलाएं अन्न जल जैसे किसी भी चीज का सेवन नहीं करती है। बरगद के वृक्ष की परिक्रमा और पूजा करके वापस आने के बाद जो पकवान और मिष्ठान व्रत में बरगद वृक्ष को अर्पित किया जाता हैं वही चीजें महिलाएं घर पर आकर व्रत पूजन पूरा करने के उपरांत अपने परिवार के साथ मिलकर खाती हैं. इसके अलावा वट सावित्री व्रत में आम, चना, पूरी, खरबूजा, पुआ आदि खाया जाता है।





