क्या है बटेसर मंदिर विवाद और स्थानीय जनता की राय
चार दिन पहले दिनांक 28 मार्च को तिलकानगर बटेसर मंदिर जो एक शिव मंदिर है में एक नागा साधु जिसका नाम नागा शत्रुधन दास पागल बाबा है और उनके शिष्यों ने राउरकेला डी वाई एसपी के समक्ष यह शिकायत की थी कि उन्हे कुछ पुलिस वालो ने उनकी कुटिया पर आकर जो बटेसर मंदिर परिसर में है, खीचकर निकाला और उनके सामान फेंक दिए और यह धमकी दी की दुबारा यहाँ आए तो जेल में डाल दुँगा।
इस संबंध में स्थानीय बंडामुंडा़ द्वारा जानकारी दी गई की 20 से 25 महिलाएं थाने में नागा साधु की शिकायत लेकर आई थी कि नागा साधु से महिलाओं को कुछ आपत्ति है, इसलिए वह नहीं चाहती की साधू इस मंदिर की कुटिया में रहे। जिसके बाद थाना प्रभारी के समक्ष साधु के कुछ शिष्यो ने विनती की की हम चाहते है कि साधू यही रहे।
इसपर थाना प्रभारी ने मंदिर की देखरेख करने वाले रबी स्वांईं को फोनकर थाने में आने को कहा जिसपर वह थाने में आने में असमर्थता जताई, इसपर थाना प्रभारी ने उनसे कहा कि कुछ लड़के आए है जो यह नहीं चाहते कि साधु यहाँ से जाए। थाना प्रभारी ने दोनों पक्षो को बैठ कर मामला सुलझाने की सलाह दी।
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इसपर साधु का शिष्य काशीनाथ सिंह उर्फ़ बंबईया, बबलू नाथ (लोको पायलट) ने दूसरे दिन 29 मार्च की संध्या में पूरे बस्ती के लोगो को बैठक में आने का आह्वान किया,पर रवी स्वाई और साधू की शिकायत करने वाली महिलाएं बैठक में उपस्थित नहीं हुई। जब बबलूनाथ (लोको पायलट) काशीनाथ सिंह उर्फ़ बंबइया के पक्ष में सैकडो़ बस्ती के कई लोग मंदिर परिसर में जुट चुके थे उस समय बंडामुंडा़ थाना से सहायक निरीक्षक एस आर गीरी एक महिला पुलिस के साथ आए और कहा कि दोनों पक्ष के लोग जाओ और थाने में केश करो। इसपर उपस्थित लोग नाराज होकर कहे कि थाने में तो प्राभारी साहब ने कहा कि आपस में मामला सुलझाओ और आप दोनों पक्षों को केश करने की सलाह दे रहे हो। और पुलिस के विरोध में नारेबाजी करने लगे।
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और बबलू नाथ ने कहा कि बाबा पर जो आरोप लगा है उसे या तो साबित करो या माफी मांगों। बाबा की बेइज्जती हम नहीं सहेगे।
जो महिला थाने में साधु के विरोध में शिकायत लेकर गई थी उस महिला से पुछने पर की आप लोग कौन कौन गए थे महिला ने कहा कि हम किसी को नहीं पहचानते है।
पुरा मामला देखा जाए तो ऐसा लगता है कि साधू पर आरोप प्रत्यारोप और मंदिर पर हक जमाने की नारेबाजी से ऐसा लगता है कि मामला केवल मंदिर पर अपना वर्चस्व कायम करने का है और साधू को व्यर्थ ही बदनाम किया जा रहा है जिनमें महिला को मोहरा बनाया जा रहा है। और रवि स्वाईं द्वारा पुलिस को झूठी जानकारी देकर उपयोग किया जा रहा है और इस काम में महिलाओं को हथियार बनाया जा रहा है। बस्ती के लोगों ने रवि स्वाईं के विरोध में अपना मत दिया है।

पर क्यों?
बस्ती के लोगों का कहना है कि रवि स्वाईं मंदिर को नीजी संपत्ति की तरह उपयोग कर रहा है, और मंदिर के उत्थान के लिए मिलने वाले धन से अपनी तिजोरी भरने में लगा है दसकों मंदिर के सेवादारी की पर मंदिर का कुछ भी विकास नहीं कर पाया,और वह जिस घर में रह रहा है, वह घर मंदिर का है जिसे पुजारी, और मंदिर के सेवादार को रहने के लिए बनवाया गया है। और बस्ती के लोग नहीं चाहते की रवी स्वाईं का मंदिर में किसी तरह से हस्तक्षेप रहे। अगर ऐसा हुआ तो उन्हें घर खाली करना पड़ेगा। शायद इसीलिए रवि स्वाईं मंदिर में अपना कब्जा जमाए रखने के लिए छल, बल, कल, अपना रहा है और शायद इसीलिए नागा साधु पर महिलाओं के जरिए झूठा आरोप लगाया, क्योंकि नागा साधु पर लगा आरोप अबतक साबित नहीं हुआ और ना ही वह औरतें सामने आयी जो साधु पर असभ्य होने का आरोप लेकर थाने में शिकायत करने गई थी।





